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Pitru Paksha and Chandra Grahan: चंद्रग्रहण के साए में पितृपक्ष की शुरुआत, पूर्वजों को कैसे दिलाएं मोक्ष?

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Pitru Paksha: चंद्र ग्रहण के साए में पितृपक्ष का शुरू होना विशेष महत्व रखता है। इस समय पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। जिससे चंद्रग्रहण के प्रभाव को कम किया जा सके और पूर्वजों को मोक्ष दिलाया जा सके।

चंद्रग्रहण के साए में पितृपक्ष की शुरूआत, पूर्वजों को कैसे दिलाएं मोक्ष?
Pitru Paksha Start in Chandra Grahan: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है। इन दिनों में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, लेकिन इस साल चंद्रग्रहण के साए में पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में पितरों को मुक्ति कैसे दिलाएं और उनका आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें। ऐसा माना जाता है कि जब पितृपक्ष के दौरान चंद्र ग्रहण जैसी खगोलीय घटना होती है, तो श्राद्ध कर्म करने के नियमों में कुछ बदलाव आ जाते हैं। चंद्र ग्रहण को एक अशुभ घटना माना जाता है और इस दौरान कई धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं। पितृपक्ष के दौरान चंद्र ग्रहण का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह पितरों से जुड़ा एक विशेष समय है। 

शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष वह समय होता है जब हमारे पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं। इस दौरान श्राद्ध और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। यदि कोई पूर्वज अपनी मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाए हैं, तो पितृपक्ष में किया गया कर्मकांड उन्हें मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।

पितरों को जल अर्पित करने की प्रक्रिया को तर्पण कहते हैं। यह उन्हें तृप्त करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा चावल और जौ से बने पिंडों को पितरों को अर्पित करने की क्रिया को पिंडदान कहते हैं। जब पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण के साथ हो रही हो, तो इन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है।

सूतक काल में बचें

चंद्रग्रहण के सूतक काल (ग्रहण से 9 घंटे पहले) और ग्रहण के दौरान श्राद्ध या तर्पण जैसे कर्मकांड न करें। सूतक काल को अशुभ माना जाता है।

ग्रहण के बाद करें श्राद्ध

ग्रहण समाप्त होने के बाद ही श्राद्ध और तर्पण करें। इस समय स्नान करके ही पूजा शुरू करें। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 5:30 बजे) में तर्पण करना बहुत शुभ होता है।

गंगाजल का उपयोग

तर्पण के लिए गंगाजल का उपयोग करें, क्योंकि इसे सबसे शुद्ध माना जाता है। तर्पण के लिए जल, काले तिल, जौ और कुश (एक प्रकार की घास) का उपयोग करें।

इन विधियों से किया गया तर्पण और श्राद्ध चंद्रग्रहण के प्रभाव को कम करता है और पितरों को मोक्ष दिलाने में मदद करता है। यदि आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो आपके पूर्वज प्रसन्न होंगे और उनका आशीर्वाद आपके परिवार पर हमेशा बना रहेगा।

पितृ शांति के लिए करें ये उपाय

चंद्र ग्रहण के दौरान पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए कछ उपाय किए जा सकते हैं। ग्रहण के दौरान श्राद्ध करना वर्जित होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त में श्राद्ध करना चाहिए। ग्रहण के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए और गरीबों को दान करना चाहिए। ग्रहण के बाद पितरों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

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