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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन बाद शुरू हो जाएगा पंचक काल, इन कामों से रहें दूर!

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Panchak Kaal: रक्षाबंधन पर्व के अगले दिन पंचक काल शुरू होने जा रहा है। पंचक काल में लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इस बार पंचक रविवार के दिन शुरू हो रहे हैं। इसलिए इस रोग पंचक माना जा रहा है। 
 

रक्षाबंधन बाद शुरू हो जाएगा पंचक काल, इन कामों से रहें दूर!
Panchak Kaal Start After Raksha Bandhan: हिन्दू धर्म में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला पर्व हर साल बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। इस साल 2025 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 9 अगस्त दिन शनिवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस साल यह पर्व भद्रा और पंचक के साए से पूरी तरह मुक्त है, जिसका मतलब है कि आप पूरे दिन राखी बांध सकते हैं। हालांकि, रक्षाबंधन के बाद पंचक काल शुरू होगा, जिसके कारण कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए।

द्रिक पंचांग के अनुसार, पंचक 10 अगस्त को सुबह 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होंगे और 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 6 मिनट तक रहेंगे। अगस्त में पंचक रविवार से शुरू हो रहे हैं, लिहाजा ये रोग पंचक होंगे। रोग पंचक के दौरान लोगों में मानसिक, शारीरिक कष्ट बढ़ जाते हैं। लिहाजा इस दौरान सावधानी बरतें, ताकि बीमारी, चोट-चपेट से बचाव हो सके।

क्या है पंचक काल?

ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करता है और रेवती नक्षत्र तक रहता है, तो इस अवधि को पंचक काल कहते हैं। यह लगभग 5 दिनों का समय होता है। पंचक को कुछ शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किया गया कोई भी अशुभ काम पांच बार दोहराया जाता है। यह ध्यान देने वाली बात है कि सारे पंचक अशुभ नहीं होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पंचक किस दिन से शुरू हो रहा है।

न करें ये काम

पंचक काल में खासकर इन पांच कामों को करने की मनाही होती है। पंचक के दौरान लकड़ी, घास या जलने वाली कोई भी चीज इकट्ठा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से आग लगने का भय रहता है। पंचक के समय घर की छत या छप्पर नहीं डालना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में क्लेश और धन की हानि होती है। इस दौरान चारपाई का निर्माण करना या पलंग खरीदना अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि इससे जीवन में कई मुश्किलें आती हैं।

यात्रा और शव का दाह संस्कार

पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। पंचक में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उसका दाह संस्कार करना अशुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि परिवार के अन्य पांच लोगों पर भी संकट आ सकता है। इसके लिए दाह संस्कार से पहले विशेष उपाय किए जाते हैं। रक्षाबंधन के बाद पंचक काल के शुरू होने पर इन बातों का ध्यान रखें ताकि जीवन में आने वाली परेशानियों से बचा जा सके। 

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