Manimahesh Kailash Yatra : मणिमहेश कैलाश हिमाचल प्रदेश में स्थित है। इस पवित्र स्थान को पंच कैलाश में से एक माना जाता है। हर साल कई शिव भक्त मणिमहेश कैलाश की यात्रा करते हैं।
Manimahesh Kailash Yatra : कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवाश स्थान माना गया है। बता दें कि इस पर्वत पर कई तरह की यात्राएं होती हैं। जैसे कैलाश मानसरोवर यात्रा, मणिमहेश कैलाश यात्रा, कैलाश यात्रा आदि। लेकिन क्या आप जानते हैं मणिमहेश कैलाश कहा स्थित है। मणिमहेश कैलाश हिमाचल प्रदेश में स्थित है। इस पवित्र स्थान को पंच कैलाश में से एक माना जाता है। हर साल कई शिव भक्त मणिमहेश कैलाश की यात्रा करते हैं। कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित मानसरोवर झील की तरह ही यहां भी एक झील स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती के विवाह से पहले मणिमहेश कैलाश का निर्माण किया था। आज इस खबर में मणिमहेश कैलाश यात्रा के बारे में जानेंगे।
मणिमहेश कैलाश एक है पवित्र तीर्थ स्थल
बता दें कि मणिमहेश कैलाश पर्वत हिमाचल प्रदेश के एक जिला चंबा में स्थित पवित्र स्थान है। यह पर्वत पंच कैलाश में से एक है। मणिमहेश कैलाश के पास कैलाश पर्वत जैसी एक झील भी है। इस झील का नाम मणिमहेश झील है। ऐसा माना जाता है कि मानसरोवर और मणिमहेश झील की ऊंचाई लगभग समान है। मणिमहेश झील की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 4000 मीटर है, जबकि मणिमहेश कैलाश की ऊंचाई 5486 मीटर है।
मणिमहेश कैलाश यात्रा
प्रत्येक साल भगवान भोलेनाथ के कई भक्त मणिमहेश कैलाश की यात्रा करने के लिए आते हैं। मणिमहेश कैलाश की यात्रा भरमौर से शुरू होती है। बता दें कि यह यात्रा करीब 13 किलोमीटर का है। यहां यात्रियों को करीब 13 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। हर साल भाद्रपद माह में यहां यात्रा शुरू होती है। साल 2025 में मणिमहेश कैलाश की यात्रा 26 अगस्त से शुरू होगी।
क्या है धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती अक्सर मणिमहेश कैलाश में विचरण करते हैं। भगवान शिव ने पार्वती माता से विवाह करने से पहले मणिमहेश पर्वत का निर्माण किया था। ऐसा माना जाता है कि कैलाश पर्वत की तरह यह मणिमहेश कैलाश भी अजेय है, यानी इसके शिखर पर अब तक कोई नहीं पहुंच पाया है। एक बार भारत-जापान के एक दल ने इस पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी लेकिन वे सफल नहीं हुए। स्थानीय लोगों के अनुसार, भगवान शिव की इच्छा के बिना कोई भी इस पर्वत पर नहीं चढ़ सकता।
एक स्थानीय किंवदंती के अनुसार, एक बार गद्दी समुदाय के एक व्यक्ति ने अपनी भेड़ों के साथ पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी। हालांकि, वह चोटी तक नहीं पहुंच सका और रास्ते में ही वह और उसकी भेड़ें पत्थर में बदल गईं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मणिमहेश पर्वत की मुख्य चोटी के नीचे की छोटी चोटियां गद्दी समुदाय के व्यक्ति और उसकी भेड़ों के पत्थर में बदल जाने के कारण बनी हैं।