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Mahamrityunjaya Mantra: कहां से आया है महामृत्युंजय मंत्र, जानिए इसकी उत्पत्ति की खास कहानी

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Mahamrityunjaya Mantra: देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्हें मुक्तिदाता और वरदानों का देवता माना जाता है। भोलेनाथ के वैदिक मंत्रों का जाप करने से कष्ट दूर होते हैं और समृद्धि आती है।

Mahamrityunjaya Mantra
Mahamrityunjaya Mantra: देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्हें मुक्तिदाता और वरदानों का देवता माना जाता है। भोलेनाथ के वैदिक मंत्रों का जाप करने से कष्ट दूर होते हैं और समृद्धि आती है। ऐसा ही एक शास्त्रोक्त मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र, जिसके जाप मात्र से मनुष्य को सुख, समृद्धि, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मार्कंडेय ऋषि, ऋषि मार्कण्डु के पुत्र थे अब हमारे मन में यह प्रश्न आता है कि अचूक शक्तियों वाला यह मंत्र कहां से आया? इसकी उत्पत्ति किसने की और इसके पीछे क्या कारण था। 

प्राचीन शास्त्रों के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि को अमरता का वरदान प्राप्त है। मार्कण्डेय ऋषि का नाम आठ अमर व्यक्तियों में शामिल है। मार्कण्डेय ऋषि के पिता का नाम ऋषि मार्कण्डु था। शास्त्रोक्त कथा के अनुसार जब मार्कण्डेय ऋषि को बहुत समय तक कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान शिव की आराधना की। 

ऋषि दंपत्ति की तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव प्रकट हुए तो उन्होंने मार्कण्डेय ऋषि से पूछा कि उन्हें गुणहीन और दीर्घायु पुत्र चाहिए या गुणवान और अल्पायु, 16 वर्ष की आयु वाला पुत्र। तब मार्कण्डेय ऋषि ने दूसरा विकल्प चुना और महादेव से गुणवान और अल्पायु पुत्र मांगा।

यमराज स्वयं मार्कण्डेय ऋषि के प्राण लेने आए

जैसे-जैसे मार्कण्डेय बड़े हुए, उन्हें अपनी अल्पायु के बारे में पता चला। उम्र बढ़ने के साथ-साथ मार्कण्डेय की शिव के प्रति भक्ति भी बढ़ती गई। उन्हें अपनी मृत्यु के बारे में पता था लेकिन वे इससे विचलित नहीं हुए। जब वे 16 वर्ष के हुए तो मार्कण्डेय को अपनी माता से अपनी मृत्यु का रहस्य पता चला। 

जिस दिन उनकी मृत्यु तय हुई, उस दिन भी वे चिंता मुक्त होकर शिव की आराधना में लीन थे। भगवान शिव की आराधना करते समय सप्तर्षियों की सहायता से उन्हें ब्रह्मदेव द्वारा महामृत्युंजय मंत्र ' ऊँ त्र्यंबकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्द्धनम्, ऊर्वारुकमिव बन्धनात, मृत्योर्मुक्षियमामृतात्।।' की दीक्षा दी गई।

यह मंत्र मार्कण्डेय के लिए अचूक कवच का काम किया और जब यमराज के दूत उन्हें लेने आए तो शिव आराधना में लीन मार्कण्डेय को ले जाने में असफल रहे। इसके बाद यमराज स्वयं मार्कण्डेय के प्राण लेने धरती पर आए।

शिव ने यमराज को पराजित किया

यमराज ने ऋषि मार्कण्डेय के गले में मृत्यु का फंदा डालने का प्रयास किया, लेकिन फंदा शिवलिंग पर जा लगा। शिव स्वयं वहां उपस्थित थे। यमराज के इस कृत्य से वे क्रोधित हो गए और अपने उग्र रूप में यमराज के समक्ष प्रकट हुए।

महादेव और यमराज के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें यमराज को हार का सामना करना पड़ा। भोलेनाथ ने यमराज को इस शर्त पर माफ किया कि उनके भक्त ऋषि मार्कंडेय अमर रहेंगे। इसके बाद शिव का एक नाम कालान्तक हो गया। कालान्तक का अर्थ है समय, यानी मृत्यु को समाप्त करने वाला।

कब करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप

यदि कुंडली में ग्रह दोष हो या ग्रहों से संबंधित कोई ऐसी पीड़ा हो जिसका ठीक होना मुश्किल लगता हो जैसे ग्रह गोचर, नीच ग्रह, शत्रु राशि या किसी पापी ग्रह से पीड़ित हों तो इस मंत्र का जाप लाभकारी होता है। गंभीर बीमारी और मृत्यु तुल्य पीड़ा होने पर महामृत्युंजय मंत्र संजीवनी बूटी की तरह काम करता है।

भूमि संबंधी विवादों में इस मंत्र का जाप लाभकारी होता है। किसी महामारी के फैलने की स्थिति में यह मंत्र कवच की तरह काम करता है।

सरकारी मामलों में गिरावट और धन हानि होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से समस्या दूर होती है। नाड़ी दोष और मिलान में षडाष्टक समस्याओं से भी यह मंत्र निजात दिलाता है। महामृत्युंजय मंत्र किसी भी तरह के कलह के लिए रामबाण औषधि की तरह है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय रखें ये सावधानियां

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। इन नियमों का पालन करके आप महामृत्युंजय मंत्र जाप का पूरा लाभ उठा सकते हैं और किसी भी तरह के अनिष्ट का भय भी समाप्त हो जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप पूरी पवित्रता और निष्ठा के साथ करना चाहिए। मंत्र जाप से पहले संकल्प लेना चाहिए। मंत्र जाप में मंत्र के उच्चारण की शुद्धता जरूरी है। मंत्र जाप से पहले मंत्रों की एक निश्चित संख्या निर्धारित कर लेनी चाहिए। संकल्प किए गए मंत्रों की संख्या पूरी होनी चाहिए। मंत्र का मानसिक रूप से यानी मन में या बहुत धीमी आवाज में जाप करना सबसे अच्छा रहेगा। 

जाप के दौरान दीपक जलता रहना चाहिए।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना सबसे अच्छा रहेगा। जप माला को गौमुखी में रखकर करना चाहिए ताकि किसी की नजर उस पर न पड़े। जप करते समय शिवलिंग, शिव मूर्ति, शिवजी का चित्र अथवा महामृत्युंजय यंत्र सामने होना चाहिए। जप करते समय कुश के आसन पर बैठना चाहिए। 

जप के दौरान दूध मिश्रित जल से शिव अभिषेक करना चाहिए। जप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए। जप का स्थान और समय निश्चित होना चाहिए। जप के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सात्विक भोजन करना चाहिए। किसी की बुराई करने से बचना चाहिए।

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