facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  maa chandraghanta kaisa hai maa chandraghanta ka swarup pooja vidhi labh aur mahatva janiye

Ma Chandrghanta : कैसा है मां चंद्रघंटा का स्वरूप, पूजा विधि, लाभ और महत्व जानिए

जीवांजलिPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Ma Chandrghanta : नवरात्रि का शुभ त्योहार देवी दुर्गा के नौ दिव्य रूपों की पूजा के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में, भक्त शक्ति, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद पाने के लिए देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं।

Ma Chandrghanta : 
Ma Chandrghanta : नवरात्रि का शुभ त्योहार देवी दुर्गा के नौ दिव्य रूपों की पूजा के लिए समर्पित है। इन नौ दिनों में, भक्त शक्ति, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद पाने के लिए देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है, जिनकी पूजा नवदुर्गा के तीसरे रूप के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन से डर, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति मिलती है। माँ का यह रूप शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम माना जाता है एक ओर जहाँ वे बुरी ताकतों का नाश करती हैं, वहीं दूसरी ओर वे अपने भक्तों को शांति और सुरक्षा प्रदान करती हैं।

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?

देवी चंद्रघंटा की सवारी बाघ है। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। माँ के इस रूप की दस भुजाएँ हैं। उनके बाईं ओर के हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल है जबकि पाँचवाँ बायाँ हाथ वरद मुद्रा में है। उनके दाईं ओर के चार हाथों में कमल, तीर, धनुष और जपमाला है जबकि पाँचवाँ दायाँ हाथ अभय मुद्रा में है।

माता चंद्रघंटा की पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद, आपको लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।

इसके बाद, पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और वहाँ माँ की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

फिर धूप और दीपक जलाएं और माँ को सिंदूर, चंदन का लेप , धूप और साबुत चावल के दाने अर्पित करें।

माँ को चमेली के फूल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। अगर चमेली के फूल न मिलें, तो आप उन्हें कोई भी पीला फूल चढ़ा सकते हैं।

भोग के तौर पर आप माता को खीर, शहद या दूध से बनी मिठाइयाँ चढ़ा सकते हैं। पूजा के दौरान 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः' मंत्र का जाप करना आपके लिए फायदेमंद होगा।

इसके अलावा, पूजा के समय आप दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और ऐसे ही दूसरे ग्रंथों का पाठ भी कर सकते हैं।

पूजा के आखिर में आरती करें और माता के सामने अपनी दिल की बात कहें।

माँ चंद्रघंटा की पूजा के फायदे

माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, माता अपने सभी भक्तों को लंबी उम्र का आशीर्वाद देती हैं और उनकी भलाई का ध्यान रखती हैं। माँ चंद्रघंटा शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं; इसलिए, नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा करने से भक्तों पर शुक्र की कृपा बनी रहती है। नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त का मन 'मणिपुर चक्र' पर केंद्रित होता है इसलिए, एकाग्र और स्थिर मन से माता की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से भक्त अपने आस-पास माता की दिव्य ऊर्जा को महसूस कर पाते हैं।

नवरात्रि के तीसरे दिन का क्या महत्व है?

नवरात्रि के तीसरे दिन का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। यह दिन भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और संतुलन का संदेश देता है। माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा से मन का डर दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माता की कृपा से व्यक्ति में मुश्किल हालात का सामना करने की आंतरिक शक्ति आती है। आध्यात्मिक नज़रिए से यह दिन मणिपुर चक्र से जुड़ा है जो मानव शरीर में आंतरिक शक्ति, इच्छाशक्ति और ऊर्जा का केंद्र है। माँ चंद्रघंटा की पूजा से यह ऊर्जा केंद्र जागृत होता है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।


यह भी पढ़ें:-

Shardiya Navratri: मां दुर्गा को नारियल ही क्यों चढ़ाते हैं? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता 

Shardiya Navratri: कलश स्थापना करते समय इन नियमों का रखें ध्यान, जानें सही विधि 

Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को कराएं भोजन? जानें धार्मिक मान्यता 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel