facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  festivals›  shardiya navratri ke teesre din kare maa chandraghanta ki puja janiye shubh muhurat mantra pujan vidhi bhog

Shardiya Navratri: नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, पूजन विधि व भोग

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद की जाती है। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय शुभ माना जाता है। 

Shardiya Navratri:
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मां का स्वरूप जितना शांत और सौम्य है, उनका रूप उतना ही शक्तिशाली भी है। ऐसे में भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा करते हैं और माता रानी को प्रिय भोग अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है कि साल 2026 में नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कब की जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और किस मंत्र के जाप से मां की आराधना करनी चाहिए? आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा से जुड़ी जरूरी बातें...

कब है नवरात्रि का तीसरा दिन?

शारदीय नवरात्रि का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जा रही है। इस क्रम में मां चंद्रघंटा की पूजा 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को की जाएगी। हालांकि, व्रत और पूजा की तिथि निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग में तिथि के समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां का वाहन सिंह है और उनकी दस भुजाएं हैं। उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र और अन्य दिव्य वस्तुएं विराजमान रहती हैं। मां का यह स्वरूप शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा करके जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं।

मां चंद्रघंटा पूजा का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद की जाती है। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त में श्रद्धापूर्वक पूजा करना और मां का ध्यान लगाना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र

मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त पूजा के समय मां के ध्यान मंत्र और बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। मां का ध्यान करने के लिए यह मंत्र पढ़ा जाता है:

'पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥'


इसके अलावा मां चंद्रघंटा के बीज मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का जाप भी किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करते हुए मां से सुख, शांति और साहस की कामना कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजन विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाएं और मां को अक्षत, लाल या पीले फूल, रोली, चंदन तथा धूप अर्पित करें। इसके बाद मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और पूजा मंत्र का जाप करें। मां को उनका प्रिय भोग अर्पित करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करें।

मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयां अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त मां को खीर, दूध से बनी मिठाई या अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगा सकते हैं। कुछ परंपराओं में मां को सफेद मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं। भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और अर्पित करने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट दें। मां को भोग लगाते समय अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार प्रसाद तैयार करना पर्याप्त है।

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को भय और नकारात्मक विचारों पर विजय पाने की प्रेरणा मिलती है। मां का सिंह पर सवार स्वरूप साहस और शक्ति का संदेश देता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने वाले भक्तों को जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिलता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना करते समय भक्त उनसे परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।


यह भी पढ़ें:-

Shardiya Navratri: मां दुर्गा को नारियल ही क्यों चढ़ाते हैं? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता 

Shardiya Navratri: कलश स्थापना करते समय इन नियमों का रखें ध्यान, जानें सही विधि 

Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को कराएं भोजन? जानें धार्मिक मान्यता 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel