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Kumbh Sankranti 2025: कुंभ संक्रांति के दिन स्नान-दान का है बहुत ज्यादा महत्व, इस दिन होगा सूर्य व शनि का मिलन

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kumbh Sankranti 2025 Date : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ संक्रांति के दिन सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करता है। कुंभ राशि शनि की राशि है और शनिदेव सूर्य देव के पुत्र हैं। ऐसे में कुंभ संक्रांति पर पुत्र और पिता का मिलन होता है।

Kumbh Sankranti 2025
Kumbh Sankranti 2025 Date : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ संक्रांति के दिन सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करता है। कुंभ राशि शनि की राशि है और शनिदेव सूर्य देव के पुत्र हैं। ऐसे में कुंभ संक्रांति पर पुत्र और पिता का मिलन होता है, इसलिए कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थ स्थल पर स्नान, दान, तर्पण आदि धार्मिक अनुष्ठान करने वालों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और शनि के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।

कुंभ संक्रांति 2025 तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, कुंभ संक्रांति 12 फरवरी 2025 बुधवार को मनाई जाएगी।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म में संक्रांति तिथि का महत्व पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी तिथि के बराबर ही है।

कुंभ संक्रांति 2025 स्नान-दान मुहूर्त

कुंभ संक्रांति पुण्य काल - दोपहर के 12 बजकर 35 से लेकर शाम 06 बजकर 09 मिनट तक है।

अवधि - 05 घंटे 34 मिनट

कुंभ संक्रांति महा पुण्य काल - शाम 04 बजकर 18 से लेकर शाम को 06 बजकर 09 तक है

अवधि - 01 घंटे 51 मिनट

कुंभ संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देने और सूर्य की पूजा करने से सफलता मिलती है। सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है, सूर्य देव की पूजा करने से लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही भगवान आदित्य के आशीर्वाद से जीवन के कई दोष भी दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार संक्रांति पर्व पर स्नान करने वाले को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है। कुंभ संक्रांति पर ऐसे करें सूर्य-शनि को मजबूत

कुंभ संक्रांति के दिन सुबह में उठकर गंगा स्नान करने की परंपरा होती है।

स्नान के बाद पानी में गंगा जल और तिल मिलाकर भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद मंदिर में दीपक जलाएं।

पानी में काले तिल और कुश मिलाकर पितरों को जल चढ़ाएं।

काली गाय या कुत्ते को खाना खिलाएं। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

पूजा के बाद किसी गरीब व्यक्ति या पंडित को सामग्री दान करें।

कंबल, गेहूं, घी, गुड़, चप्पल आदि दान कर सकते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार कपड़े भी दान कर सकते हैं।

 इस दिन बिना तेल, घी और तिल-गुड़ से बनी चीजें ही खाएं।

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