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Kedarnath dham history: आज से खुल गया बाबा केदारनाथ का द्वार, जानें मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kedarnath dham history: केदारनाथ मंदिर के कपाट 2 मई 2025 यानी आज भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इससे पहले अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोले गए थे।

Kedarnath dham history
Kedarnath dham history: केदारनाथ मंदिर के कपाट 2 मई 2025 यानी आज भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इससे पहले अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोले गए थे। बाबा बद्रीनाथ मंदिर के कपाट भी 4 मई को खोले जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार केदारनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में से 11वां माना जाता है। साथ ही यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। कहा जाता है कि केदारनाथ धाम की कहानी बेहद अनोखी और रोचक है। माना जाता है कि केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राचीन मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। आइए जानते हैं केदारनाथ मंदिर के बारे में खास बातें।

केदारनाथ मंदिर की कहानी


 
Kedarnath dham history
केदारनाथ मंदिर के बारे में प्रचलित कहानी के अनुसार पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें हत्या के पाप से मुक्त किया था। मान्यता है कि महाभारत का युद्ध जीतने के बाद पांचों पांडव अपने भाइयों की हत्या से मुक्ति पाने के लिए भगवान भोलेनाथ की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान पांडवों से प्रसन्न नहीं थे। भगवान उनके कर्मों से खुश नहीं थे, इसलिए वे केदारनाथ चले गए।

 
Kedarnath dham history
पांडव भी उनके दर्शन के लिए केदारनाथ पहुंचे। जब पांडव वहां पहुंचे तो भगवान शिव ने भैंसे का रूप धारण कर लिया। जिसके बाद वे अन्य जानवरों के बीच चले गए ताकि पांडव भगवान शिव के उस रूप को पहचान न सकें। कहा जाता है कि भीम ने विशालकाय शरीर धारण कर दो पहाड़ों पर अपने पैर फैला दिए।

 
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जिसके बाद सभी जानवर उस पहाड़ के नीचे से निकल आए, लेकिन वहां मौजूद एक भैंसा ऐसा नहीं कर सका। जिसके बाद भीम ने पूरी ताकत से भैंसे पर झपट्टा मारा, लेकिन वह जमीन में धंसने लगा। तब भीम ने उसकी पीठ का पिछला हिस्सा पकड़ लिया। कहा जाता है कि भगवान शिव ने भैंसे का रूप धारण कर लिया था।
 
Kedarnath dham history
मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने पांडवों की इच्छाशक्ति से प्रसन्न हो गए। इसके बाद उन्हें दर्शन भी दिए। भगवान शिव ने पांडवों को हत्या के पाप से मुक्त होने का आशीर्वाद भी दिया। पौराणिक मान्यता है कि तब से केदारनाथ में भैंसे की पीठ को शिव का रूप माना गाया है और उसकी विधि-विधान से पूजा होने लगी।

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