Kedarnath Yatra 2025: सनातन धर्म में सभी देवों के देव महादेव को माना गया है। बता दें कि जो भी शिव भक्त होते हैं, वे पूरे जीवनकाल में एक बार केदारनाथ यात्रा पर जरूर जाना चाहते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ धाम भी है।
Kedarnath Yatra 2025: सनातन धर्म में सभी देवों के देव महादेव को माना गया है। बता दें कि जो भी शिव भक्त होते हैं, वे पूरे जीवनकाल में एक बार केदारनाथ यात्रा पर जरूर जाना चाहते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ धाम भी है। इस धाम पर प्रत्येक साल लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ आते हैं। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक बाबा केदारनाथ के दर्शन करने आते हैं उनके सारे दुख-दर्द और कष्ट मिट जाते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक केदारनाथ धाम आते हैं उनके ऊपर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। साथ ही साथ उनकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं। बता दें कि केदारनाथ यात्रा का इस समय कपाट बंद है। श्रद्धालु बड़े ही बेसब्री से बाबा के कपाट खुलने का इंतजार कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले डोली उत्सव मनाया जाता है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि आखिर डोली परंपरा क्या है, इसका महत्व क्या है। इसके बारे में विस्तार से जानेंगे।
क्या है डोली उत्सव और केदारनाथ मंदिर से जुड़ी परंपरा
बता दें कि साल 2025 में केदारनाथ मंदिर के कपाट 2 मई को खोले जाएंगे। इस दिन केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने से पहले कई तरह की परंपराएं निभाया जाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ के कपाट खोलने से पहले बाबा भैरवनाथ की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद केदारनाथ की पंचमुखी डोली ऊखीमठ से केदारनाथ धाम ले जाया जाता है। पंचमुखी डोली ले जाने के बाद ही अगले दिन विधि-विधान से केदारनाथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। सभी भक्त भगवान शिव के दर्शन भी कर सकते हैं।
क्या होता है पंचमुखी डोली
पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब बाबा केदारनाथ का मंदिर अगले छह महीने तक गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान रहते हैं। भगवान केदारनाथ की डोली पांच मुख वाली होती है। बता दें कि इस डोली के अंदर बाबा केदारनाथ की चांदी की भोग मूर्ति विराजमान होती है। बाबा केदारनाथ की भोग मूर्ति को इसी डोली में केदारनाथ ले जाया जाता है। माना जाता है कि इस मूर्ति की पूजा छह माह तक केदारनाथ तो छह माह तक शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।