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Kashi Ratneshwar Mahadev Mandir: काशी के इस मंदिर को अहिल्याबाई ने दिया था श्राप, जानें इतिहास

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kashi Ratneshwar Mahadev Mandir: भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसा वाराणसी शहर या काशी अनोखा है, इसकी गलियां अनोखी हैं और 'बाबा की नगरी' के मंदिर भी अनोखे हैं। काशी की धरती पर पैर रखते ही आपको कई ऐसी चीजें दिखेंगी, जो आपको हैरान कर देंगी।

Kashi Ratneshwar Mahadev Mandir
Kashi Ratneshwar Mahadev Mandir: भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसा वाराणसी शहर या काशी अनोखा है, इसकी गलियां अनोखी हैं और 'बाबा की नगरी' के मंदिर भी अनोखे हैं। काशी की धरती पर पैर रखते ही आपको कई ऐसी चीजें दिखेंगी, जो आपको हैरान कर देंगी। हर साल एक तिल बढ़ने वाला तिलभांडेश्वर, कहीं संकरी गली में विराजमान है तो कहीं गंगा को छूता प्राचीन रत्नेश्वर महादेव मंदिर 9 डिग्री के कोण पर झुका हुआ है। विदेशी हो या देशी पर्यटक, इस अद्भुत शहर को देखकर कहते हैं 'क्या बात है गुरु'। इस प्राचीन मंदिर को देखकर आपको इटली की पीसा मीनार की याद आ जाएगी, लेकिन यह मंदिर पीसा मीनार से भी ज्यादा झुका हुआ है।

9 डिग्री के कोण पर झुका रत्नेश्वर मंदिर

पंडित जी ने बताया है कि भगवान शिव का मंदिर देखकर आप हैरान रह जाएंगे। 9 डिग्री के कोण पर झुका रत्नेश्वर मंदिर बनारस के 84 घाटों में से एक सिंधिया घाट पर स्थित है। गुजराती शैली में बने इस मंदिर पर अद्भुत कलाकृति उकेरी गई है। नक्काशी के साथ-साथ इसकी विशिष्टता को देखने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। इस मंदिर को मातृ ऋण महादेव, काशी का झुका मंदिर या काशी करवट के नाम से भी जाना जाता है।

अहिल्याबाई ने दिया था श्राप

ज्योतिषी ने मंदिर के निर्माण की जानकारी भी दी। रानी अहिल्याबाई ने गंगा किनारे की यह जमीन अपनी दासी रत्नाबाई को दी थी, जिसके बाद रत्नाबाई ने इस मंदिर को बनवाने की योजना बनाई और इसे पूरा भी किया। रानी अहिल्याबाई ने मंदिर निर्माण के लिए न सिर्फ जमीन दी बल्कि उन्हें धन भी दिया। निर्माण पूरा होने के बाद जब अहिल्याबाई वहां पहुंची तो मंदिर की सुंदरता पर मोहित हो गई और दासी से कहा, 'मंदिर को कोई नाम देने की जरूरत नहीं है। लेकिन रत्नाबाई ने इसमें अपना नाम जोड़कर इसका नाम रत्नेश्वर महादेव रख दिया। इससे अहिल्याबाई नाराज हो गई और उन्होंने श्राप दे दिया और मंदिर झुक गया।

सावन में नहीं होते बाबा के दर्शन

काशी निवासी और भक्त सोनू अरोड़ा ने मंदिर के बारे में रोचक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हम हमेशा बाबा के दर्शन करने आते हैं। लेकिन भोलेनाथ को प्रिय सावन के महीने में रत्नेश्वर महादेव में दर्शन और पूजा संभव नहीं है। इसका कारण सावन के महीने में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ना है। गंगा का पानी गर्भगृह में आ जाता है, जिससे बाबा के दर्शन संभव नहीं हो पाते। 12 महीनों में से करीब 8 महीने यह मंदिर पानी में डूबा रहता है, जिससे दर्शन संभव नहीं हो पाते।

रत्नेश्वर मंदिर के बारे में अन्य कथा

एक किवदंती भी प्रचलित है रत्नेश्वर मंदिर के बारे में कहा जाता है कि राजा मानसिंह के सप्तमेश में से एक महीने में उनकी माता रत्नाबाई का मंदिर जलमग्न हो गया था। उनके लिए एक मंदिर बनवाया गया। मंदिर बन जाने के बाद सेवक अहंकारी हो गया और कहने लगा कि उसने अपनी मां का कर्ज चुका दिया है। वह जितना यह कहता रहा, मंदिर उतना ही झुकता गया। लेकिन मां के कर्ज से कभी मुक्ति नहीं मिल सकती, इसलिए यह मंदिर टेढ़ा हो गया।

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