Kaise Shuru Hota Hai Panchak Kaal : वैदिक पंचांग के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 दिन मंगलवार से पंचक की शुरुआत हो रही है। वैदिक ज्यतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक को ऐसा नक्षत्र माना गया है।
Kaise Shuru Hota Hai Panchak Kaal : वैदिक पंचांग के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 दिन मंगलवार से पंचक की शुरुआत हो रही है। वैदिक ज्यतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक को ऐसा नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना मना होता है। जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से रेवती नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में भ्रमण करता है, तब पंचक काल होता है। पांच दिनों की इस अवधि में किया गया कोई भी कार्य शुभ फल नहीं देता है और इस दौरान बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है। इस बार पंचक काल मंगलवार 22 अप्रैल से शुरू होकर शनिवार 26 अप्रैल को खत्म हो रहा है। आइए जानते हैं पंचक काल में कौन से काम नहीं करने चाहिए।
कैसे शुरू होता है पंचक काल
चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन तक रहता है और जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में आता है, तब पंचक काल शुरू होता है क्योंकि चंद्रमा इन दो राशियों में 5 दिन तक रहता है। चंद्रमा राशि परिवर्तन के साथ ही प्रतिदिन एक नक्षत्र में प्रवेश भी करता है, जो धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से प्रारंभ होता है। पंचक काल को अशुभ नक्षत्रों का योग माना जाता है और इसकी शुरुआत 22 अप्रैल मंगलवार से हो रही है। जब पंचक मंगलवार से शुरू होता है तो उसे अग्नि पंचक कहते हैं और इस बार यह मृत्यु पंचक के दिन यानी शनिवार को समाप्त हो रहा है, इसलिए इन 5 दिनों में अत्यधिक सावधानी से काम करना जरूरी है।
पंचक में मृत्यु
अग्नि पंचक में कोई भी कठिन और जोखिम भरा काम नहीं करना चाहिए। पंचक काल में मृत्यु को बहुत अशुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अगर पंचक में किसी की मृत्यु होती है तो उसके रिश्तेदार या परिवार में 5 अन्य लोगों की मृत्यु का खतरा रहता है, हालांकि इससे बचने का एक उपाय भी बताया गया है। इस खतरे से मुक्ति पाने के लिए शव का अंतिम संस्कार करते समय कुश या आटे की 5 पुड़िया बनाई जाती हैं और फिर उन्हें शव के पास रखकर दाह संस्कार कर दिया जाता है, ऐसा करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है।