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Ujjain Panchkoshi Yatra 2025 : उज्जैन में कब शुरू होगी पंचकोसी यात्रा, जानें यात्रा से जुड़े रहस्यमयी बातें

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Ujjain Panchkoshi Yatra 2025 : पौराणिक और धार्मिक मान्यता के अनुसार, मध्यप्रदेश उज्जैन में पंचकोसी यात्रा 23 अप्रैल से शुरू होगी। यह यात्रा वैशाख कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर शुरू होगी।

Ujjain Panchkoshi Yatra 2025
Ujjain Panchkoshi Yatra 2025 : पौराणिक और धार्मिक मान्यता के अनुसार, मध्यप्रदेश उज्जैन में पंचकोसी यात्रा 23 अप्रैल से शुरू होगी। यह यात्रा वैशाख कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर शुरू होगी। यह यात्रा मध्य प्रदेश के विभिन्न स्थानों से शुरू होती है। 

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रद्धालु पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में नारियल चढ़ाकर भगवान से शक्ति लेकर यात्रा पर निकलेंगे। 27 अप्रैल को अमावस्या के दिन भगवान को मिट्टी का घोड़ा चढ़ाकर शक्ति लौटाने के बाद अपने घर लौटेंगे। 

उज्जैन में 118 किमी की यात्रा 

हमेशा की तरह इस बार भी श्रद्धालु तय तिथि से दो दिन पहले 21 अप्रैल से ही पहले पड़ाव पिंगलेश्वर की ओर यात्रा शुरू कर देंगे। उज्जैन में पंचकोसी यात्रा की तय तिथि वैशाख कृष्ण दशमी से अमावस्या तक है। 

देशभर से श्रद्धालु पांच दिन तक पांच कोस पैदल चलकर पंचदेव की पूजा करते हैं। यात्रा की शुरुआत नागचंद्रेश्वर के दर्शन से होती है। इसके बाद 118 किमी की पदयात्रा करते हुए पिंगलेश्वर, कायावरुहानेश्वर, दुर्दुरेश्वर और बिल्वकेश्वर का दर्शन-पूजन करेंगे।

नियम के अनुसार, उज्जैन में पंचकोशी यात्रा निर्धारित समय पर ही शुरू होनी चाहिए। लेकिन इस यात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है। भीड़ से बचने और पड़ाव स्थलों पर यात्री सुविधाओं का पहले लाभ पाने के लिए भक्त दो दिन पहले ही यात्रा के लिए रवाना हो जाते हैं। 

इस बार भी श्रद्धालु 21 अप्रैल से यात्रा के लिए रवाना होने लगेंगे। परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पड़ाव स्थलों पर पहले से ही व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। 

सत्तू, दाल बाटी और कच्चे आम, प्याज का प्रयोग 

वैदिक पंचांग के अनुसार, उज्जैन में पंचकोसी यात्रा वैशाख माह की भीषण गर्मी में की जाती है। बता दें कि इन दिनों दोपहर का तापमान कम से कम 42 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। गर्मी के इन पांच दिनों में खुले में रहना बहुत ही कठीन बात है साथ ही यह अपने आप में एक तपस्या है। इस मौसम में खुद को स्वस्थ रखने और धर्म की आराधना के लिए श्रद्धालु सुबह सत्तू का सेवन करते हैं। दिन में दाल बाटी के साथ कच्चे आम और प्याज की चटनी का सेवन किया जाता है। छाछ, खीरा, मौसमी फल आहार का हिस्सा हैं।

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