Vinayak Ganesh Chaturthi: हिंदू पंचांग के अनुसार, विनायक गणेश चतुर्थी हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। जून 2025 में आषाढ़ मास की विनायक चतुर्थी 28 जून को पड़ेगी।
Vinayak Ganesh Chaturthi: हिंदू पंचांग के अनुसार, विनायक गणेश चतुर्थी हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। जून 2025 में आषाढ़ मास की विनायक चतुर्थी 28 जून को पड़ेगी। पंचांग के आधार पर आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 जून 2025, सुबह 09:53 बजे शुरू होगी और 29 जून 2025 को दोपहर 09:14 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार, पूजा और व्रत 28 जून को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन से बाधाएं हटाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
विनायक गणेश चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखती है, क्योंकि यह भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का दाता कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से गणपति की पूजा और व्रत करने से जीवन की सभी रुकावटें दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और सुख-शांति का आगमन होता है। आषाढ़ मास की विनायक चतुर्थी खास इसलिए भी है, क्योंकि यह वर्षा ऋतु के दौरान आती है, जो प्रकृति के नवीकरण और उर्वरता का प्रतीक है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो नए कार्य शुरू करना चाहते हैं, आर्थिक समृद्धि की कामना करते हैं या संतान सुख और वैवाहिक जीवन में स्थिरता की इच्छा रखते हैं। भक्तों का विश्वास है कि गणेश जी की कृपा से बुद्धि तेज होती है और जीवन में शुभता आती है।
विनायक गणेश चतुर्थी पौराणिक कथा
विनायक गणेश चतुर्थी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक प्रमुख कथा भगवान गणेश के जन्म और उनके प्रथम पूज्य बनने की है। एक बार स्नान करने से पहले देवी पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक सुंदर बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने बालक को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हों, तब तक वह दरवाजे पर पहरा दे और किसी को भी अंदर न आने दे। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो बालक ने उन्हें रोक दिया, क्योंकि वह उन्हें नहीं पहचानता था। क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया। यह देख माता पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हुईं। अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा में जाकर पहले मिलने वाले प्राणी का सिर लाएं, जिसकी मां उससे विमुख हो। गणों को एक हाथी का बच्चा मिला, जिसका सिर वे ले आए। शिवजी ने उस सिर को बालक के धड़ से जोड़कर उसे जीवित कर दिया। इस तरह गणेश जी गजानन के रूप में प्रकट हुए।
माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया कि वे सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होंगे और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से होगी, तब से विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश की भक्ति और उनके विघ्नहर्ता स्वरूप की महिमा का प्रतीक बन गया।
पूजन विधि
सुबह स्नान करें। पूजा स्थल को साफ करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
गणेश जी का अभिषेक गंगाजल, कच्चा दूध, शहद, घी और पंचामृत से करें।
गणेश जी को 21 दूर्वा, लाल फूल, शमी का पत्ता, सिंदूर, चंदन, और मोदक या लड्डू अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री- जैसे सिंदूर, बिंदी चढ़ाएं।
शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं।
गणेश जी को मोदक, लड्डू, नारियल या फल का भोग लगाएं। 5 लड्डू ब्राह्मणों को दान करें और 5 गणेश जी के चरणों में अर्पित करें। घी के दीपक से आरती करें और प्रसाद बांटें।
दिनभर फलाहार करें या निराहार रहें। तामसिक भोजन से बचें।
विशेष उपाय
गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें और 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें।
गणेश जी को लाल फूल और चावल चढ़ाएं, और गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
गणेश-पार्वती की युगल मूर्ति की पूजा करें और संकटनाशक स्तोत्र का पाठ करें।
रुद्राक्ष की माला से 'ॐ वक्रतुंडाय नमः' का जाप करें।