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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी व्रत की कैसे हुई शुरुआत, जानें सही मान्यता और सही नियम

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Anant Chaturdashi Puja: अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत पांडवों के समय से मानी जाती है। इसका मूल उद्देश्य जीवन से संकटों को दूर करना और भगवान विष्णु की कृपा पाना है।

How did Anant Chaturdashi fast start Know Niyam and Importance
Anant Chaturdashi Vrat Importance: अनंत चतुर्दशी हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और साथ ही इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है। इसकी शुरुआत और मान्यताओं के बारे में धार्मिक ग्रंथों में विशेष विवरण मिलता है।

व्रत की शुरुआत कैसे हुई? 

अनंत चतुर्दशी व्रत की उत्पत्ति से जुड़ी मुख्य कथा महाभारत काल से मानी जाती है। महाभारत के समय जब पांडव जुए में सब कुछ हार गए और वनवास भोगने लगे, तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी। श्रीकृष्ण ने कहा कि यह व्रत करने से समस्त दुख दूर हो जाएंगे और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। युधिष्ठिर ने पूरे नियम से इस व्रत को किया और पांडवों के जीवन में धीरे-धीरे सुख और सफलता लौट आई।

पूजन विधि

अनंत चतुर्दशी के मौके पर अपने घर में कलश स्थापित करें और उसमें शेषनाग पर विराजमान विष्णु भगवान की मूर्ति/चित्र रखें। धूप, दीप, फल, फूल और प्रसाद अर्पित करें। 14 प्रकार के फूल, 14 प्रकार के फल और 14 प्रकार के पत्तों का अर्पण शुभ माना गया है। पूजा के बाद कुमकुम और हल्दी से सने लाल या पीले रंग के धागे पर 14 गांठ लगाएं। पुरुष इसे दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। इस धागे को अनंत सूत्र कहा जाता है, जो भगवान विष्णु के आशीर्वाद का प्रतीक है।

अनंत चतुर्दशी पूजा मंत्र

पूजा के समय भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए यह मंत्र “ॐ अनन्ताय नमः” बोला जाता है। इसे कम से कम 108 बार जपना शुभ माना गया है।

अनंत सूत्र बांधते समय प्रार्थना

जब अनंत सूत्र (14 गांठ वाला धागा) हाथ में बांधें, तब यह प्रार्थना बोली जाती है। 

“अनन्त संसार महासुमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव।
अनन्तरूपे विनियोग्यमानं अनन्तबन्धनं अनन्तरूपाय नमः।।“


“हे भगवान वासुदेव! हम इस अनंत संसार रूपी महासागर में डूबे हुए हैं। आप हमें उद्धार करें। यह अनंत सूत्र आपके अनंत स्वरूप को अर्पित है।”

अनंत भगवान की कथा

एक ब्राह्मण पत्नी सुषीला ने भी इस व्रत को किया और अपने जीवन में खुशहाली पाई। अनंत भगवान (शेषनाग, जो भगवान विष्णु के शयन स्थल हैं) के पूजन और धागे के बंधन से जीवन में अनंत सुख और धन की प्राप्ति होती है।

सही मान्यता

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा होती है। व्रती को हाथ में 14 गांठ वाला धागा (अनंत सूत्र) बांधना चाहिए। यह धागा या तो लाल या पीले रंग का होना चाहिए। इसे बांधने से घर में सुख-समृद्धि और संकटों का नाश होता है। यह व्रत 14 वर्षों तक लगातार करने का नियम है।

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