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Heramb Sankashti Chaturthi 2025: हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत का इस विधि से करें पारण, जानें सही विधि और नियम

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Sankashti Chaturthi Vrat: हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत सही विधि और नियम से करने पर जीवन के संकट समाप्त होकर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलता है। गणपति बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए इस व्रत को श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता के साथ करें।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत का इस विधि से करें पारण, जानें सही विधि और नियम
Heramb Sankashti Chaturthi 2025 Vrat Paran: हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश के हेरंब स्वरूप को समर्पित है, जिन्हें पांच सिर और दस भुजाओं वाला माना जाता है। यह व्रत जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि पाने के लिए रखा जाता है। आज की चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी भी कहते हैं, क्योंकि यह मंगलवार को पड़ रही है, और यह संयोग बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और विशेषकर बुद्धि, व्यापार और स्वास्थ्य में उन्नति होती है।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत एक दिन मन को शुद्ध करने का संकल्प लें। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ और पवित्र वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थान को साफ कर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। व्रत के दौरान दिनभर केवल फलाहार लें, जल का सीमित सेवन करें।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि

  1. सबसे पहले एक कलश में जल भरकर, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें। फिर हाथ में जल लेकर “ॐ श्री हेरंब गणपतये नमः” बोलते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. गणेश जी को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, गंध, लाल वस्त्र अर्पित करें और मोदक, लड्डू, गुड़, नारियल और फल अर्पित करें।
  3. “ॐ गं हेरंबाय नमः” या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें और हेरंब संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें।
  4. गणेश जी की आरती करें और परिवार सहित भक्ति भाव से गाएं। इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दान करें।

हेरंब संकष्टी चतुर्थी पारण की विधि

  1. हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पारण किया जाता है। रात को जब चंद्रमा उदय हो जाए, तब सबसे पहले चंद्र दर्शन करें।
  2. एक थाली में चावल, अक्षत और जल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें। गणेश जी से प्रार्थना करें कि आपके जीवन के सभी विघ्न दूर हों।
  3. उसके बाद गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाकर, स्वयं और परिवार को प्रसाद वितरित करें। तभी फलाहार या अन्न ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
  4. व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करें। व्रत के दिन झूठ, क्रोध, आलस्य और अपशब्द से बचें। पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व है, इन्हें अवश्य अर्पित करें।
  5. सूर्यास्त के बाद अन्न का सेवन न करें, केवल चंद्र दर्शन के बाद ही पारण करें। व्रत करने वाले को नित्य स्नान, पूजा-पाठ और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
यदि कोई इस व्रत को 21 या 51 बार लगातार करे तो उसे अद्भुत फल प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल पुरुष बल्कि महिलाएं और बच्चे भी कर सकते हैं। व्रत के दौरान किसी जरूरतमंद को भोजन या वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।

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