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Hartalika Tee  : हरतालिका तीज नाम पड़ने की क्या है कहानी? पौराणिक कथाओं में ये है जिक्र

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Hartalika Teej  : हरतालिका तीज का पवित्र त्योहार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल, सोमवार, 14 सितंबर को देश भर की विवाहित महिलाएं अपने परिवार की भलाई और पति की लंबी उम्र के लिए यह कठिन व्रत रखेंगी।

Hartalika Teej 
Hartalika Teej  : हरतालिका तीज का पवित्र त्योहार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल, सोमवार, 14 सितंबर को देश भर की विवाहित महिलाएं अपने परिवार की भलाई और पति की लंबी उम्र के लिए यह कठिन व्रत रखेंगी। इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करना पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह खास दिन देवी पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन का प्रतीक है। विवाहित महिलाओं के साथ-साथ, अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस दिन पूरी श्रद्धा और रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।

'हरतालिका तीज' नाम की उत्पत्ति

इस व्रत को 'हरतालिका' इसलिए कहा जाता है क्योंकि देवी पार्वती की सहेलियों ने उन्हें उनके पिता के घर से अगवा कर लिया था और जंगल में ले गई थीं। देवी पार्वती ने मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और हमेशा उनकी तपस्या में लीन रहती थीं। उनकी इस इच्छा को जानकर, उनकी सहेलियाँ उन्हें घने जंगल में ले गईं। सहेलियों द्वारा इस तरह ले जाने  के कारण ही इस व्रत का नाम 'हरतालिका' व्रत पड़ा।

हरतालिका तीज की कथा

इस व्रत से जुड़ी देवी पार्वती और भगवान शिव की कथा बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि देवी सती अपने पिता के यज्ञ में अपने पति शिव का अपमान सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में खुद को भस्म कर लिया। अगले जन्म में, उन्होंने राजा हिमाचल के यहाँ जन्म लिया और भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए फिर से कठोर तपस्या की। देवी पार्वती ने मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और हमेशा उनकी तपस्या में लीन रहती थीं।

राजा हिमाचल की चिंता

अपनी बेटी की हालत देखकर राजा हिमाचल चिंतित हो गए। उन्होंने ऋषि नारद से इस बारे में बात की। नारद की सलाह पर, उन्होंने अपनी बेटी उमा की शादी भगवान विष्णु से करने का फैसला किया।

पार्वती का शादी से इनकार

पार्वती भगवान विष्णु से शादी नहीं करना चाहती थीं। उनकी भावनाओं को समझते हुए, उनकी सहेलियाँ उन्हें घने जंगल में ले गईं। जैसा कि पहले बताया गया है, सहेलियों द्वारा इस तरह ले जाने के कारण ही इस व्रत का नाम 'हरतालिका' व्रत पड़ा।

कठोर तपस्या करना

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को, हस्त नक्षत्र में, देवी पार्वती ने रेत से एक शिवलिंग बनाया। वह भगवान शिव की स्तुति में लीन रहीं, रात भर जागती रहीं और अन्न-जल का त्याग कर दिया। यह कठोर तपस्या 12 वर्षों तक चली। उनकी भक्ति और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया, जैसा कि उन्होंने चाहा था।

सुहाग की सामग्री दान करने का विशेष महत्व

इस पवित्र दिन पर पूजा के दौरान देवी पार्वती को सुहाग की सामग्री  अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और सुंदर वस्त्र अर्पित करके महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। पूजा पूरी होने के बाद, ये चीजें किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दी जाती हैं। माना जाता है कि इस दिन ऐसा दान करने से घर में हमेशा अन्न और धन की बरकत बनी रहती है। अगले दिन सुबह व्रत का पारण करके इस कठिन व्रत को पूरा किया जाता है। सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की कठिनाइयों को दूर करती है और सुख-समृद्धि प्रदान करती है। 

 पूजा के लिए खास नियम


व्रत का संकल्प:हरतालिका तीज के दिन, महिलाएं सुबह जल्दी उठती हैं, सरगी करती हैं और व्रत रखने का पक्का संकल्प लेती हैं।

दिन भर की भक्ति: संकल्प लेने के बाद, वे बिना पानी पिए पूरा दिन ध्यान और प्रार्थना में बिताती हैं।

शाम की पूजा की तैयारी: शाम को महिलाएं सुंदर कपड़े और गहने पहनकर इकट्ठा होती हैं वे रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां बनाती हैं और उन्हें स्थापित करती हैं।

धार्मिक चढ़ावा: पूजा तय रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है, जिसमें मूर्तियों को फल, फूल, धूप और दीये चढ़ाए जाते हैं।

रात भर जागना और भक्ति गीत: देवी-देवताओं के सम्मान में रात भर जागकर भक्ति गीत गाने की सदियों पुरानी परंपरा है।

खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद: पूरी श्रद्धा के साथ यह कठिन व्रत रखने से परिवार की भलाई और समृद्धि बनी रहती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

 

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