महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रा प्रदेश के देव स्थान ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है। तीनों के बीच इस बात को लेकर विवाद चल रहा है।
hanuman ji ka janm sthan: आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में आंजनेद्री पर्वत पर, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर के पास आंजनेरी पर्वत पर, कर्नाटक के हंपी से 25 किलोमीटर दूर अनेगुंडी गांव में, झारखंड के गुमला, हरियाणा के कैथल, गुजरात के डांग, राजस्थान के सुजानगढ़, छत्तीसगढ़ के बस्तर और उत्तराखंड के देहरादून में हनुमान जी के जन्म स्थान होने का दावा किया जाता रहा है। इसको लेकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रा प्रदेश के देव स्थान ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है। तीनों के बीच इस बात को लेकर विवाद चल रहा है। यह तीनों ही राज्य के लोग दावा करते हैं कि हमारे यहां पर ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। आओ जानते हैं कि क्या कहते हैं पौराणिक प्रमाण।
1. अंजनाद्रि पर्वत, आंध्रप्रदेश:
आंध्रप्रदेश की 'तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड का दावा है कि भगवान हनुमान का जन्म आकाशगंगा जलप्रपात के नजदीक जपाली तीर्थम में हुआ था। टीटीडी के द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरलीधर शर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई पंडित परिषद ने हनुमान जन्म स्थान के संबंध में एक शोध पत्र तैयार कर रिपोर्ट बनाई थी। जिसमें अनेक पौराणिक, भौगोलिक, साहित्यिक और वैज्ञानिक तथ्यों एवं सबुतों का हवाला देकर अंजेयनाद्री पहाड़ी को हनुमान जन्म स्थान सिद्ध किया गया। आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमाला में अंजनाद्रि पर्वत स्थित है।
आंध्रा की पंडित परिषद के दावे के अनुसार सुंदरकांड के 35वें सर्ग के 81 से 83 श्लोक तक यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि माता अंजनी ने तिरुमाला की इस पवित्र पहाड़ी पर हनुमानजी को जन्म दिया था। इसके अलावा महाभारत के वनपर्व के 147वें अध्याय में, वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के 66वें सर्ग, स्कंद पुराण के खंड एक श्लोक 38 में, शिव पुराण शत पुराण के 20वें अध्याय और ब्रह्मांड पुराण श्री वेंकटाचल महामात्य तीर्थ काण्ड में भी इसका उल्लेख मिलता है। कम्ब रामायण और अन्नमाचार्य संकीर्तन भी इसी स्थान का संकेत करते हैं। Hanuman Janmotsav 2025: नहीं दूर हो रही हैं परेशानियां, हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा के समय कर लें ये चमत्कारी काम
पंडित परिषद का मानना है कि वेंकटाचल माहात्म्य और स्कन्द पुराण में बताया गया है कि अंजना देवी ने मतंग ऋषि के पास जाकर पुत्र प्राप्ति का रास्ता बताने के लिए निवेदन किया था। उन्हीं के निवेदन पर माता अंजनी वेंकटाचलम पर्वत पर तपस्या करने चली गई और कई वर्षों के तप के बाद उन्हें हनुमान जी के रूप में पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। वेंकटाचलम को अंजनाद्रि सहित 19 नामों से जाना जाता है और त्रेता युग में अंजनाद्रि में हनुमान का जन्म हुआ था।
भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर सातवें स्थान पर वेंकटाद्री पहाड़ी पर स्थित है और नारायणाद्री, शेषाद्री और गरुड़ादरी तिरुमाला की अन्य पहाड़ियों में से हैं। हनुमान की माता का नाम अंजना देवी है। जिन्होंने तिरुमाला की सात पहाड़ियों में से एक में तप किया था और इसे उनके नाम पर 'अंजनाद्रि' नाम दिया गया था।
2. अंजनहल्ली किष्किंधा नगरी, कर्नाटक:
कर्नाटक में श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का दावा है कि वाल्मीकि रामायण निर्दिष्ट करती है कि हनुमान का जन्म किष्किंधा के अंजनहल्ली में हुआ था, जिसके बारे में माना जाता है कि यह हम्पी के पास तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित था। कर्नाटक का दावा है कि हंपी से 25 किलोमीटर दूर अनेगुंडी गांव ही प्राचीन किष्किंधा नगरी है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायण कालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपा सरोवर स्थित है। यहां स्थित एक पर्वत में एक गुफा भी है जिसे राम भक्त शबरी के नाम पर 'शबरी गुफा' कहते हैं। इसी के निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि के नाम पर प्रसिद्ध 'मतंगवन' था। Hanuman Janmotsav 2025: क्यों प्रिय है हनुमान जी को सिंदूर? जानिए बजरंगबली की पूजा विधि
3. अंजनेरी पर्वत, त्र्यंबकेश्वर महाराष्ट्र:
महाराष्ट्र के नासिक में त्र्यंबकेश्वर से कुछ किलोमीटर दूर अंजनेरी में हनुमानजी का जन्म स्थान होने का दावा भी महाराष्ट्र के लोग करते आ रहे हैं। यह गांव अंजनेरी पर्वत की तलहटी में स्थित है, जिसका नाम हनुमान की मां अंजना के नाम पर रखा गया है। अंजनेरी नासिक से त्र्यंबक रोड पर 20 किमी दूर है। अंजनेरी पहाड़ पर हनुमान जी के साथ अंजनी माता का मंदिर है।
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस गांव का नाम अंजनेरी इसलिए पड़ा क्योंकि गांव से सटे पहाड़ पर हनुमानजी की मां अंजनी का निवास था। अंजनगढ़ नाम के इसी पहाड़ पर मौजूद एक गुफा में हनुमानजी का जन्म हुआ था। ब्रह्म पुराण में इसका जिक्र है। ब्रह्म पुराण में इसको लेकर एक कथा भी है जिसमें माता अंजना पूर्वजन्म में एक अप्सरा थी। इंद्र के शाप के चलते उन्हें मानव योनी में जन्म लेना पड़ा। शाप के बाद वे यहीं पर रहने लगी थी और बाद में यहीं पर उनकी वानरराज केसरी से विवाह हुआ और इसके बाद हनुमान जी का जन्म हुआ। Famous Hanuman Temple: हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर करें बजरंगबली के इन प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन
स्थानीय लोगों का दावा है कि रामायण में जिस किष्किंधा का जिक्र किया गया वो नासिक और इगतपुरी की इन्ही पहाड़ियों के बीच कहीं बसी थी और यहीं पर सुग्रीव ने शरण ले रखी थी। लक्ष्मण ने कुछ किलोमीटर के फासले पर मौजूद पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काटी थी। सीता हरण के बाद जब राम-लक्ष्मण सीता माता को खोजने निकले तो इन्हीं पहाड़ों के नीचे उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई थी, जिन्होंने उनकी दोस्ती सुग्रीव से करवाई थी।
उल्लेखनीय है कि पौराणिक मान्यता और शोध के आधार पर तीनों स्थान के दावों का नकारा नहीं जा सकता परंतु अधिकतर तथ्य कर्नाटक में जन्म स्थान होने की ओर संकेत करते हैं। हालांकि इस पर निष्पक्ष रूप से शोध किए जाने की आवश्यकता है।