दूर्वा और गुड़हल का भेंट
भगवान गणेश को दूर्वा (दूब घास) और गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दूर्वा की 21 गांठें बांधकर माला बनाएं और इसे अर्पित करें। साथ ही, गुड़हल के फूल चढ़ाएं। यह उपाय कार्यों में सफलता और बाधाओं को दूर करने में सहायक है। माना जाता है कि दूर्वा में अमृत का अंश होता है, जो गणेश जी को प्रसन्न करता है।
गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ
यदि आप घर, भूमि या संपत्ति से संबंधित इच्छा रखते हैं तो इस दिन गणेश पंचरत्न स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। इस स्तोत्र का पाठ करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है और आर्थिक समस्याएं हल होती हैं। पाठ के बाद गणेश जी को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जो संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं।
शमी के पत्तों की पूजा
संकष्टी चतुर्थी पर शमी के पेड़ की पूजा करने और इसके पत्ते गणेश जी को अर्पित करने से दुख और दरिद्रता दूर होती है। शमी का पेड़ गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। यदि संभव हो, तो शमी के पत्तों को जल में मिलाकर गणेश जी का अभिषेक करें। यह उपाय आर्थिक तंगी और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक है।
धनदाता गणेश मंत्र का जाप
धन-संपत्ति और समृद्धि की कामना के लिए इस दिन गणेश मंत्र की 11 माला का जाप करें। जाप के बाद गणेश जी को गुड़ और घी का भोग लगाएं। यह मंत्र धनदाता गणेश का मंत्र माना जाता है, जो आर्थिक समस्याओं को दूर करता है और व्यवसाय में लाभ दिलाता है।
शीघ्र विवाह के लिए मंत्र जाप
अविवाहित लोग जो जल्दी विवाह की कामना रखते हैं, वे इस दिन गणेश मंत्र की 11 माला जपें। जाप के बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं और विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। यह उपाय विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है और विवाह संबंधी बाधाओं को शीघ्र दूर करता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ
गजानन संकष्टी चतुर्थी पर संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस स्तोत्र में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है, जो सभी प्रकार के संकटों को दूर करता है। पाठ के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और वस्त्र दान करें। यह उपाय संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
चंद्रमा को अर्घ्य
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण होता है। रात में चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय चंद्र मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक शांति और पारिवारिक सुख को बढ़ाता है।
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