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Gajanan Sankashti Chaturthi: गजानन संकष्टी चतुर्थी पर करें ये उपाय, पूरी होगी हर मनोकामना!

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Gajanan Sankashti Chaturthi Remedies: गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से भगवान गणेश की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। इस दिन की गई विशेष पूजा और उपायों से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

 गजानन संकष्टी चतुर्थी
Gajanan Sankashti Chaturthi Upay: गजानन संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष 14 जुलाई को मनाई जाएगी। यह व्रत भक्तों के लिए सुख, शांति, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति का वरदान लेकर आता है। इस दिन की गई विशेष पूजा और उपायों से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं गजानन संकष्टी चतुर्थी के महत्व और इस दिन किए जाने वाले कारगर उपायों के बारे में...

गजानन संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है- संकटों को हरने वाली चतुर्थी। सावन मास में पड़ने वाली इस चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों को धन, वैभव और सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सावन मास में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा का विशेष महत्व होने के कारण इस चतुर्थी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

इस दिन भक्त सुबह से व्रत रखते हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि गणेश जी की कृपा से न केवल व्यक्तिगत समस्याएं हल होती हैं, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का भी वास होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो बुध ग्रह की महादशा या गोचर से प्रभावित हैं, क्योंकि गणेश जी बुध ग्रह के अधिपति हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी के प्रभावी उपाय

दूर्वा और गुड़हल का भेंट
भगवान गणेश को दूर्वा (दूब घास) और गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दूर्वा की 21 गांठें बांधकर माला बनाएं और इसे अर्पित करें। साथ ही, गुड़हल के फूल चढ़ाएं। यह उपाय कार्यों में सफलता और बाधाओं को दूर करने में सहायक है। माना जाता है कि दूर्वा में अमृत का अंश होता है, जो गणेश जी को प्रसन्न करता है।

गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ
यदि आप घर, भूमि या संपत्ति से संबंधित इच्छा रखते हैं तो इस दिन गणेश पंचरत्न स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। इस स्तोत्र का पाठ करने से रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है और आर्थिक समस्याएं हल होती हैं। पाठ के बाद गणेश जी को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जो संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं।

शमी के पत्तों की पूजा
संकष्टी चतुर्थी पर शमी के पेड़ की पूजा करने और इसके पत्ते गणेश जी को अर्पित करने से दुख और दरिद्रता दूर होती है। शमी का पेड़ गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। यदि संभव हो, तो शमी के पत्तों को जल में मिलाकर गणेश जी का अभिषेक करें। यह उपाय आर्थिक तंगी और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक है।

धनदाता गणेश मंत्र का जाप  
धन-संपत्ति और समृद्धि की कामना के लिए इस दिन गणेश मंत्र की 11 माला का जाप करें। जाप के बाद गणेश जी को गुड़ और घी का भोग लगाएं। यह मंत्र धनदाता गणेश का मंत्र माना जाता है, जो आर्थिक समस्याओं को दूर करता है और व्यवसाय में लाभ दिलाता है।

शीघ्र विवाह के लिए मंत्र जाप
अविवाहित लोग जो जल्दी विवाह की कामना रखते हैं, वे इस दिन गणेश मंत्र की 11 माला जपें। जाप के बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं और विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। यह उपाय विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है और विवाह संबंधी बाधाओं को शीघ्र दूर करता है।

संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ
गजानन संकष्टी चतुर्थी पर संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस स्तोत्र में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है, जो सभी प्रकार के संकटों को दूर करता है। पाठ के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और वस्त्र दान करें। यह उपाय संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

चंद्रमा को अर्घ्य
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण होता है। रात में चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय चंद्र मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक शांति और पारिवारिक सुख को बढ़ाता है।

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