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Hanuman Ji Ke Kis Roop Ki Puja: हनुमानजी के किस रूप की पूजा करना चाहिए, क्या मिलेगा फल?

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Hanuman Ji Ke Kitne Roop: प्रत्येक हनुमान की पूजा का अलग फल है। यह आपको तय करना होगा कि आपको कौन सी हनुमानजी की पूजा करना चाहिए।

Hanuman Ji Ke Kis Roop Ki Puja:
Hanuman Ji Ke Kitne Roop: हनुमान जी के कई रूप हैं। जैसे रुद्र रूप हनुमान, पंचमुखी हनुमान, एकादशी हनुमान, वीर हनुमान, भक्त हनुमान, दास हनुमान, सूर्यमुखी हनुमान, दक्षिणमुखी हनुमान, उत्तरमुखी हनुमान, संकट मोचन हनुमान, उड़ते हुए हनुमान, पर्वत उठाए हनुमान, राम मिलन हनुमान, ध्यान करते हनुमान आदि। प्रत्येक हनुमान की पूजा का अलग फल है। यह आपको तय करना होगा कि आपको कौन सी हनुमानजी की पूजा करना चाहिए।

एकादशी रुद्र हनुमान

हनुमानजी को रुद्र यानी शिव का ही ग्यारहवां अवतार माना गया है। वे शिवजी के 11 रुद्रों में से एक हर नाम के रुद्र थे और उन्होंने ही सतयुग में देवताओं की रक्षार्थ अपने शरीर को गलाकर माता अंजनी के गर्भ से हनुमान के रूप में जन्म लिया था। इन रुद्र रूप की पूजा घोर संकट काल में करते हैं। 

दास हनुमान

दासहनुमान राम के आगे हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। उनकी पूंछ जमीन पर रहती है। दासहनुमान की मूर्ति को पूजा में रखते हैं। इनकी पूजा करने से हनुमानजी की तरह भक्त भी राम का दास बनकर रामजी की शरण में रहकर जीवन में सुख और शांति प्राप्त करता है। यह रूप हनुमान जी की राम के प्रति समर्पण और सेवा को दर्शाता है। यह रूप व्यक्ति में समर्पण भाव को जगाता है।

भक्त हनुमान

भक्त हनुमान का चित्र प्रभु श्री राम की भक्ति और भजन करते हुए हैं। यह रूप हनुमान जी की राम के प्रति अटूट भक्ति को दर्शाता है। यदि आप भी अपने जीवन में भक्ति चाहते हैं तो हनुमानजी के इस रूप की पूजा करें। यदि यह चित्र आपके घर में है तो आप में भक्ति और विश्वास का संचार होगा। यह भक्ति और विश्वास ही आपके जीवन की सफलता का आधार है। इससे एकाग्रता और शक्ति भी बढ़ती है।

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वीर हनुमान

वीर हनुमान योद्धा मुद्रा में होते हैं। उनकी पूंछ उत्थित रहती है व दाहिना हाथ माथे की ओर मुड़ा रहता है। कभी-कभी उनके पैरों तले राक्षस की मूर्ति भी होती है। भूतावेश, जादू-टोना इत्यादि द्वारा कष्ट दूर करने के लिए वीर हनुमान की उपासना करते हैं। यह रूप हनुमान जी की शक्ति और साहस को दर्शाता है।

वाममुखी

वाममुखी या उत्तर दिशा में मुख किए हुए हनुमान की पूजा आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते हैं। उत्तर दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है, इसलिए शुभ और मंगल की कामना उत्तरामुखी हनुमान की उपासना से पूरी होती है। केसरिया या पितांबर रंग के इस स्वरूप की पूजा करने पर सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

दक्षिणमुखी हनुमान

इस मूर्ति का मुख दक्षिण की ओर होता है इसलिए इसे दक्षिण मुखी हनुमान कहते हैं। जादू-टोना, मंत्र-तंत्र इत्यादि प्रयोग प्रमुखतः ऐसी मूर्ति के सम्मुख ही किए जाते हैं। ऐसी मूर्तियां महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे, औरंगाबाद इत्यादि क्षेत्रों में व कर्नाटक में बसवनगुडी क्षेत्र में पाई जाती हैं। दक्षिण की तरफ जो मुंह है उसे भगवान नृसिंह का मुख कहा गया है, जो भय, चिंता, अलाबला, यम, पिशाच और अन्य तरह की परेशानियों से मुक्ति दिलाता है।

दक्षिणमुखी हनुमान लाल रंग के हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दक्षिण दीवार पर हनुमानजी का लाल रंग का चित्र लगाएं। ऐसा करने से अगर मंगल आपका अशुभ है तो वो शुभ परिणाम देने लगेगा। हनुमानजी का आशीर्वाद आपको मिलने लगेगा। साथ ही पूरे परिवार का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यह मंगल दोष दूर करता है। 

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पंचमुखी हनुमान

हनुमान जी ने अपना यह रूप अहिरावण का वध करने के लिए लिया था। पंचमुखी अर्था जिसमें पांच मुख होते हैं: पूर्व में हनुमान मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, उत्तर में वराह मुख, दक्षिण में नरसिंह मुख और ऊपर की ओर हयग्रीव मुख। इनकी पूजा विशेष कार्य और संकट के दौरान ही करते हैं। वास्तु विज्ञान के अनुसार पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति जिस घर में होती है वहां उन्नति के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन संपत्ति में वृद्धि होती है परंतु इन हनुमान का चित्र या मूर्ति किसी जानकार से पूछकर ही लगाना चाहिए।

यदि भवन में गलत दिशा में कोई भी जल स्रोत हो तो इस वास्तु दोष के कारण परिवार में शत्रु बाधा, बीमारी व मनमुटाव देखने को मिलता है। इस दोष को दूर करने के लिए उस भवन में ऐसे पंचमुखी हनुमानजी का चित्र लगाना चाहिए, जिनका मुख उस जल स्रोत की ओर देखते हुए दक्षिण पश्चिम दिशा की तरफ हो।

सूर्यमुखी हनुमान

हनुमानजी के गुरु सूर्यदेव हैं, इसलिए सूर्यमुखी हनुमान की उपासना से ज्ञान, विद्या, ख्याति, उन्नति और सम्मान मिलता है. 

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ऊर्ध्वमुख हनुमान

हनुमान जी का ऊर्ध्वमुख रूप घोड़े' के समरूप है, जो ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर प्रकट हुआ था। मान्यता है कि हयग्रीव दैत्य का संहार करने के लिए वे अवतरित हुए थे।

पर्वत उठाते हुए हनुमान का चित्र

हनुमानजी के इस स्वरूप की पूजा करने से साहस, बल, विश्वास और जिम्मेदारी का विकास होगा। आप किसी भी परिस्थिति से घबराएंगे नहीं। हर परिस्थिति आपके समक्ष आपको छोटी नजर आएगी और तुरंत ही उसका समाधान हो जाएगा। वीर हनुमान की पूजा से भी भक्तों को साहस की प्राप्ति होती है।

उड़ते हुए हनुमान

जीवन में सफलता, उन्नति या तरक्की चाहिए तो हनुमानजी के इस स्वरूप की पूजा करें। आप में आगे बढ़ने के प्रति उत्साह और साहस का संचार होगा। निरंतर आप सफलता के मार्ग पर बढ़ते जाएंगे।

सफेद हनुमान: यदि आप नौकरी में प्रमोशन या व्यापार में उन्नति चाहते हैं तो हनुमानजी की ऐसी फोटो लगाएं जिसमें उनका स्वरूप सफेद हो। आपने देखा भी होगा यह फोटो जिसमें उनके शरीर पर सफेद बाल हैं।

राम मिलन हनुमान

यदि आप घर परिवार में आपसी प्रेम और सहयोग चाहते हैं तो राम मिलन हनुमान की पूजा करें। हनुमान जी राम के गले मिल रहे हैं। यह भी अद्भुत चित्र है जिससे परिवार में एकता और समाज में मिलनसारिता बनी रहती है। इससे प्रेम के भाव का विकास होता है।

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ध्यान करते हनुमानजी

यदि आप जीवन में शांति और मोक्ष चाहते हैं तो ऐसे हनुमान जो आंख बंद कर ध्यान कर रहे हैं उनकी पूजा करें। ध्यान में मग्न हनुमानजी का चित्र लगाने से आपके मन में भी शांति और ध्यान का विकास होगा। हालांकि यह चित्र तब ही लगाएं जबकि आपको ध्यान और मोक्ष जैसी कोई चाहत हो।

संकटमोचन हनुमान

दाएं घुटने के बल पर बैठे और आशीर्वाद देते हुए हनुमानजी की पूजा करने से सभी तरह के संकटों का समाधान होता है। इन्हें संकटमोचन हनुमान कहते हैं। इसे घर में दक्षिण दिशा में लगाने से किसी भी प्रकार का संकट द्वार पर नहीं फटकता है।

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