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Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ? जानें नियम और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri: दुर्गा सप्तशती को देवी माहात्म्य या चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें मां दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और असुरों पर उनकी विजय का वर्णन मिलता है। 

Shardiya Navratri
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार माता की आराधना, व्रत और पाठ करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मकता का वातावरण बना रहता है। कई लोग नवरात्रि में नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इसका पाठ करने के कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं? पाठ शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और इसका धार्मिक महत्व क्या है? आइए जानते हैं।

दुर्गा सप्तशती क्या है?

दुर्गा सप्तशती को देवी माहात्म्य या चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें मां दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और असुरों पर उनकी विजय का वर्णन मिलता है। इसमें कुल 13 अध्याय हैं, जिनमें देवी के विभिन्न रूपों और उनकी शक्ति का वर्णन किया गया है।

नवरात्रि में इसका पाठ

शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त नौ दिनों तक नियमित रूप से इसका पाठ कर सकते हैं। कई लोग संपूर्ण सप्तशती का पाठ एक ही दिन में करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे नौ दिनों में अलग-अलग अध्यायों के अनुसार पूरा करते हैं।

पाठ से पहले करें तैयारी

दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर लें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। माता के सामने दीपक जलाएं और पूजा की अन्य सामग्री रखें। पाठ करने वाले व्यक्ति को स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद मन को शांत करके माता का ध्यान करें और श्रद्धा के साथ पाठ शुरू करें। धार्मिक मान्यता है कि पाठ के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए।

संकल्प के साथ करें पाठ

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले संकल्प लेने की परंपरा है। संकल्प में अपनी मनोकामना और पाठ पूरा करने का उद्देश्य माता के सामने रखा जाता है। इसके बाद विधि के अनुसार देवी का ध्यान और पूजन करके पाठ आरंभ किया जाता है।

पाठ के नियम

दुर्गा सप्तशती के पाठ के दौरान शुद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। पाठ करते समय बीच में अनावश्यक बातचीत करने से बचना चाहिए। पुस्तक को साफ स्थान पर रखकर ही पाठ करना चाहिए और उसके पन्नों को पैर या गंदे हाथ से नहीं छूना चाहिए। पाठ के दौरान उच्चारण भी स्पष्ट रखने का प्रयास करना चाहिए। यदि किसी मंत्र या श्लोक का उच्चारण ठीक से न आता हो तो जल्दबाजी करने के बजाय उसे सही तरीके से पढ़ना बेहतर माना जाता है।

नौ दिनों में कैसे करें पाठ

अगर कोई भक्त पूरे नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहता है तो अध्यायों को अपनी सुविधा के अनुसार विभाजित कर सकता है। सामान्य तौर पर पाठ को नौ दिनों में इस तरह पूरा किया जाता है कि प्रतिदिन कुछ अध्यायों का पाठ हो और नवमी के दिन पाठ का समापन किया जाए। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में पाठ के क्रम और विधि में अंतर हो सकता है, इसलिए जिस परंपरा या पूजा विधि का परिवार में पालन होता है, उसी के अनुसार पाठ करना उचित माना जाता है।

कुंजिका स्तोत्र का महत्व

दुर्गा सप्तशती के साथ सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। कई साधक सप्तशती पाठ के बाद इसका पाठ करते हैं। मान्यता है कि यह देवी उपासना का महत्वपूर्ण स्तोत्र है। हालांकि, विशेष अनुष्ठान या कठिन साधना करने से पहले योग्य आचार्य की सलाह लेना उचित रहता है।

पाठ के दौरान रखें ध्यान

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या रखने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं और तामसिक भोजन से परहेज करते हैं। पूजा-पाठ के दौरान क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास किया जाता है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दुर्गा सप्तशती का पाठ मां दुर्गा की आराधना का प्रभावी माध्यम माना जाता है। इसमें देवी को शक्ति, साहस और रक्षा का स्वरूप बताया गया है। नवरात्रि में इसका पाठ करने से भक्त मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया पाठ व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास और सकारात्मक भाव पैदा करता है। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

पाठ के बाद करें आरती

दुर्गा सप्तशती का पाठ पूरा होने के बाद मां दुर्गा की आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। इसके बाद माता से परिवार की सुख-शांति और सभी के कल्याण की प्रार्थना की जाती है। नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन या हवन करने की भी कई परिवारों में परंपरा है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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