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Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें विधि और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri: नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। 

Shardiya Navratri
Shardiya Navratri: नवरात्रि हिन्दू धर्म का अत्यंत पावन और शुभ पर्व है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से होती है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री का विधि-विधान से पूजन करते हैं। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और भक्तों को शक्ति व सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है, लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा किस विधि से करनी चाहिए, कौन सा मंत्र जाप करना चाहिए और माता को कौन सा भोग लगाना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।

पहले दिन किस स्वरूप की पूजा

नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। माता का वाहन वृषभ यानी बैल है और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित होता है। मां शैलपुत्री का स्वरूप शक्ति, शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

पूजा की तैयारी

नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें तथा उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखें। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री का पूजन शुरू करें।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के प्रथम दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा शुरू करें। फिर मां शैलपुत्री को गंगाजल अर्पित करें और रोली, अक्षत, सफेद फूल, माला, फल और प्रसाद चढ़ाएं। माता के सामने घी का दीपक और धूप जलाकर उनके मंत्र का जाप करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की आरती करें और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के अंत में माता को अर्पित प्रसाद सभी लोगों में बांटें।

मंत्र जाप और कथा पाठ

पूजा के दौरान मंत्र “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” का जाप करें।
इस मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी माना जाता है। 

माँ शैलपुत्री के लिए प्रमुख मंत्र है- 

“या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।”


इस मंत्र का जाप नियमित करने से माँ की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके बाद माँ शैलपुत्री की कथा पढ़ें या सुनें और भजन-कीर्तन करें। 

मां को लगाएं ये भोग

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि माता को घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा माता को दूध से बनी मिठाई, फल और सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है। व्रत रखने वाले भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार का प्रसाद तैयार कर सकते हैं।

पहले दिन करें ये उपाय

नवरात्रि के पहले दिन पूजा के बाद मां शैलपुत्री को सफेद फूल अर्पित करें। माता के सामने घी का दीपक जलाकर कुछ समय तक ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। घर में सुख-शांति के लिए परिवार के सभी सदस्य मिलकर मां दुर्गा की आरती करें। पूजा के दौरान माता से अपनी मनोकामना कहने के साथ परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि के पहले दिन पूजा करते समय घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। माता को अर्पित किया जाने वाला भोग सात्विक होना चाहिए। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करें। यदि घर में अखंड ज्योति जलाई जा रही है तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और उसकी लौ को बुझने न दें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटें।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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