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Dussehra : रावण के दस सिर किसका प्रतीक हैं? जानिए महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Dussehra :  विजयादशमी जिसे दशहरा भी कहा जाता है आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी।

Dussehra : 
Dussehra :  विजयादशमी जिसे दशहरा भी कहा जाता है आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि  को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि दशहरे के खास मौके पर पूरे देश में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रावण शास्त्रों का विद्वान था और उसके दस सिर उसकी शक्ति के प्रतीक थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण के ये सिर किस बात का प्रतीक हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

रावण के दस सिर किन बुराइयों का प्रतीक हैं?

काम 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण का पहला सिर उसकी बेकाबू इच्छाओं का प्रतीक है, जिन्हें उसके पतन का कारण भी माना जाता है।

क्रोध 
माना जाता है कि रावण का दूसरा सिर क्रोध का प्रतीक है। उसका गुस्सा इतना तेज़ था कि वह बिना सोचे-समझे काम करता था और अक्सर गुस्से में सारी हदें पार कर देता था।

लोभ 
कहा जाता है कि रावण का तीसरा सिर लोभ का प्रतीक है। उसके मन में दुनिया की हर चीज़ पाने की इच्छा थी और वह हर चीज़ पर अपना अधिकार जमाना चाहता था।

मोह 
रावण का चौथा सिर मोह से जुड़ा है। उसे अपनी शक्ति और धन-दौलत से बहुत ज़्यादा लगाव था, जिसके कारण वह सही और गलत के बीच फ़र्क करने की क्षमता खो बैठा था।

अहंकार 
रावण का पाँचवाँ सिर अहंकार का प्रतीक है, जिसे उसका सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है।

मद
माना जाता है कि रावण का छठा सिर 'मद' का प्रतीक है यानी अपनी शान-ओ-शौकत को लेकर होने वाला नशा या घमंड—जिसे उसकी हार का एक कारण भी बताया जाता है।

ईर्ष्या
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण का सातवाँ सिर ईर्ष्या का प्रतीक है। कहा जाता है कि दूसरों की सफलता और अच्छाई देखकर रावण का मन ईर्ष्या से भर जाता था।

चिंता
रावण का आठवां सिर चिंता का प्रतीक है, जो उसके मन को अशांत रखता था।

द्वेष
रावण का नौवां सिर द्वेष का प्रतीक है, जो उसके मन में बदले की भावना भर देता था।

अज्ञानता
रावण का दसवां और आखिरी सिर अज्ञानता का प्रतीक है, जिसने उसे धर्म और सत्य के रास्ते से भटका दिया और आखिरकार विनाश की ओर धकेल दिया।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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