Diwali Festival: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदने का उद्देश्य केवल घर की सजावट नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करना है। इसलिए मूर्ति का चुनाव करते समय धार्मिक मान्यताओं और अपनी आस्था का ध्यान रखें।
Diwali Lakshmi Ganesh Idol Buying Tips: दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। यही वजह है कि दिवाली से पहले लोग बाजार से लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्तियां खरीदकर घर लाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है? आइए जानते हैं मूर्ति खरीदने के नियम और इसका धार्मिक महत्व।
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना गया है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। दिवाली पर दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और भगवान गणेश के आशीर्वाद से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
कैसी होनी चाहिए मां लक्ष्मी की मूर्ति?
दिवाली पर मां लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा खरीदना शुभ माना जाता है, जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। मां लक्ष्मी के हाथों से धन और आशीर्वाद की मुद्रा दिखाई देनी चाहिए। उनकी मूर्ति का चेहरा प्रसन्न और शांत होना चाहिए। कुछ परंपराओं में मां लक्ष्मी की बैठी हुई प्रतिमा को घर की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है।
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मूर्ति खरीदते समय रखें ध्यान
भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा पर ध्यान देना चाहिए। सामान्य घरेलू पूजा के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। मूर्ति में भगवान गणेश का स्वरूप सुंदर, शांत और प्रसन्न होना चाहिए। उनके साथ मूषक और मोदक का होना भी अच्छा माना जाता है। ध्यान रखें कि प्रतिमा टूटी या खंडित न हो।
मिट्टी की मूर्ति खरीदना क्यों है शुभ?
दिवाली पर मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना अच्छा माना जाता है। मिट्टी की प्रतिमाएं पारंपरिक पूजा के अनुरूप होती हैं और पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प हैं। इसके अलावा प्लास्टर ऑफ पेरिस और अधिक रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के बजाय प्राकृतिक रंगों से सजी प्रतिमाएं खरीदना बेहतर रहता है।
एक साथ खरीदें लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति
दिवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां एक साथ खरीदने की परंपरा है। दोनों की प्रतिमाओं को पूजा स्थल पर उचित स्थान देकर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। हालांकि, मूर्तियों का आकार और स्वरूप अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा स्थल के अनुसार चुन सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट, रंग और सुंदरता के साथ उसकी स्थिति भी जरूर देखें। प्रतिमा कहीं से टूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए। बाजार में केवल दिखावे के आधार पर मूर्ति न खरीदें, बल्कि श्रद्धा और अपनी परंपरा को ध्यान में रखकर उसका चुनाव करें। दिवाली पर नई मूर्ति घर लाने के बाद पूजा स्थल को साफ करके श्रद्धापूर्वक उसकी स्थापना करें।
श्रद्धा और विश्वास के साथ करें पूजा
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदने का उद्देश्य केवल घर की सजावट नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करना है। इसलिए मूर्ति का चुनाव करते समय धार्मिक मान्यताओं और अपनी आस्था का ध्यान रखें। सच्चे मन से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मकता का संचार होता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।