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Diksha process: आखिर किस उम्र में लेनी चाहिए गुरु दीक्षा, जानें इसका महत्व और प्रकार

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Diksha process : आज के समय में बहुत सारे लोग आध्यात्म की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हाल में ही सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने जगद्गुरु रामाभद्राचार्य से मुलाकात की और उनसे गुरु दीक्षा भी ली। लेकिन क्या आप जानते हैं गुरु दीक्षा क्या होती है, इसका महत्व क्या है और यह किस उम्र में ली जाती है। आइए इस खबर में जानते हैं।

Diksha process
Diksha process Kya Hota Hai : आज के समय में बहुत से लोग आध्यात्म से जुड़ रहे हैं। बीते बुधवार को सेना प्रमुख सीडीएस उपेंद्र द्विवेदी भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट पहुंचे। वहां पर प्रमुख सीडीएस उपेंद्र द्विवेदी ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने श्री जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आध्यात्मिक चर्चा भी की। इसके साथ ही सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने रामभद्राचार्य से दीक्षा भी ली। 

इस दौरान रामभद्राचार्य ने उपेंद्र द्विवेदी को राम मंत्र की दीक्षा दी। आपको बता दें कि यह वही मंत्र है जो माता सीता ने हनुमान जी को दिया था जिसके बाद बजरंग बली ने लंका पर विजय प्राप्त की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर गुरु दीक्षा क्या होती है, यह कितने प्रकार की होती है और गुरु दीक्षा लेने की सही उम्र क्या है। इसके साथ ही इसका महत्व क्या है। यदि नहीं जानते हैं तो आज इस खबर में हम आपको गुरु दीक्षा से संबंधित सारी बातें को विस्तार से बताएंगे। आइए जानते हैं। 

गुरु दीक्षा क्या है 

बता दें कि दीक्षा का मतलब है किसी विशेष ज्ञान में दीक्षित होना होता है। यानी दीक्षा किसी भी व्यक्ति को आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार करती है। इसमें गुरु अपने शिष्य को एक विशेष मंत्र देते हैं जिसका पालन करना जरूरी होता है। यह आध्यात्मिक यात्रा का सबसे शुरुआती पड़ाव होता है। 

आपको बता दें कि जब एक गुरु अपने शिष्य को गुरु दीक्षा देता है उसके बाद शिष्य और गुरु की आध्यात्मिक शक्ति का उत्तराधिकारी बन जाता है। यानी दीक्षा लेने के बाद गुरु और शिष्य के बीच एक तरह से आत्मिक संबंध भी बन जाता है। दोनों की एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारी बढ़ जाती है। गुरु की जिम्मेदारी अपने शिष्य को आध्यात्म के शिखर पर ले जाने की होती है, जबकि शिष्य की जिम्मेदारी हर परिस्थिति में गुरु द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना होती है।

कितने प्रकार की होती है गुरु दीक्षा

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु दीक्षा को अलग-अलग प्रकार में बाटां गया है। आपको बता दें कि गुरु दीक्षा 5 प्रकार होती है, जिनका नाम कुछ इस प्रकार है- स्पर्श दीक्षा
दृग दीक्षा
मानस दीक्षा शक्ति
शाम्भवी दीक्षा
मांत्रिक दीक्षा

गुरु दीक्षा लेने की सही उम्र

गुरु दीक्षा लेने का सही समय 5 साल बताया गया है। अगर आप इस उम्र में गुरु दीक्षा नहीं ले पाते हैं तो आप 12 साल की उम्र तक गुरु दीक्षा ले सकते हैं।

गुरु दीक्षा का महत्व

हिंदू धर्म में जब तक हम गुरु दीक्षा नहीं लेते हैं तब तक हमारे द्वारा किए गए दान, धर्म, अनुष्ठान का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। ऐसा भी माना जाता है कि अगर आपने गुरु दीक्षा नहीं ली है तो मृत्यु के बाद मोक्ष नहीं मिलता है।

क्या गृहस्थ लोग दीक्षा ले सकते हैं

गुरु दीक्षा कोई भी ले सकता है। इसमें किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। हां, गृहस्थ जीवन जीने वालों की एक सीमा होती है क्योंकि आप गृहस्थ धर्म को छोड़ नहीं सकते।

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