Daridra Dahan Shiv Stotra: भगवान शिव भले ही संहारक हों, लेकिन उन्हें दयालु, कृपालु और रक्षक भी कहा जाता है। कहा जाता है कि भोलेनाथ को प्रसन्न करना आसान है। लोग अलग-अलग मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव की पूजा करते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, "दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम्" एक दिव्य स्तोत्र है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से आर्थिक तंगी, जीवन में आने वाली बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही साथ भगवान शिव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।बता दें कि भगवान शिव को समर्पित यह स्तोत्र बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। इस स्तोत्र में भगवान शिव के उन रूपों की स्तुति की गई है जो भक्तों की दरिद्रता दूर करते हैं, उन्हें समृद्धि और आंतरिक संतुलन प्रदान करते हैं।
दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम्
विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय
कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
गौरी प्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिप कंकणाय
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागर तारणाय
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुंडल मण्डिताय
मंजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
पंचाननाय फनिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय
आनंदभूमिवरदाय तमोमयाय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरर्चिताय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय
मातंग चर्मवसनाय महेश्वराय
दारिद्र्य दु:ख दहनाय नम: शिवाय।।
इस स्तोत्र की शुरुआत इस अर्थ से होती है कि 'मैं उन विश्वेश्वर (संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी) को नमन करता हूं, जो नरक से तारने वाले, अमृत जैसी वाणी वाले, चंद्रमा को धारण करने वाले और कपूर के समान उज्ज्वल हैं, ऐसे शिव जो दरिद्रता और दुखों का नाश करते हैं।
स्तोत्र पाठ के लाभ
इस स्तोत्र का पाठ करने से न केवल दरिद्रता का नाश होता है, बल्कि आर्थिक संकट से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलती है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
इस स्तोत्र का निरंतर पाठ करने से गृह क्लेश और दुर्भाग्य नष्ट होते हैं तथा धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
स्तोत्र पाठ की विधि
सोमवार या प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
शिवलिंग के सामने दीपक, बेलपत्र, जल और राख चढ़ाएं।
“ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
इसके बाद भक्ति भाव से “दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम” का पाठ करें।
स्तोत्र के अंत में शिव आरती करें।
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