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Char Dham Yatra: आखिर लोग क्यों करते हैं चारधाम यात्रा, जानें इसका महत्व व खास बातें

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Char Dham Yatra: चार धाम यानी बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शुरू हो गई है। वेदों और पुराणों में चार धाम यात्रा को बहुत ही शुभ माना गया है।

Char Dham Yatra
Char Dham Yatra: चार धाम यानी बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शुरू हो गई है। वेदों और पुराणों में चार धाम यात्रा को बहुत ही शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति चारों धाम की यात्रा करता है, उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 

आपको बता दें कि हिंदू धर्म में दो तरह की चार धाम यात्रा की जाती है। एक बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा और दूसरी बद्रीनाथ, जगन्नाथ, रामेश्वरम और द्वारका धाम की यात्रा। ये सभी पवित्र धाम देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं, जिस वजह से इसे बड़ा चार धाम यात्रा भी कहा जाता है। आइए जानते हैं, चार धाम यात्रा का क्या महत्व है और इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें? 

चार धाम यात्रा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम को सृष्टि का आठवां वैकुंठ भी कहा जाता है। भगवान विष्णु यहां छह महीने के लिए विश्राम करने आते हैं। साथ ही केदारनाथ धाम में भगवान शंकर विश्राम करते हैं। केदारनाथ में दो पर्वत हैं, जिन्हें नर और नारायण के नाम से जाना जाता है। 

ये भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक हैं। ऐसी भी मान्यता है कि केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद ही बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक ऐसा करते हैं उन्हें पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

शास्त्रों में बताया गया है कि चार धाम यात्रा करने से व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। एक कहावत भी कही गई है कि जो व्यक्ति एक बार भी बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे उदर यानी गर्भ में नहीं जाना पड़ता। शिव पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करने के बाद जल ग्रहण करता है, उसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता।

देश के कोने-कोने में प्रसिद्ध चार धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को विभिन्न क्षेत्रों की भाषा, इतिहास, धर्म आदि और उस स्थान से जुड़ी परंपरा से परिचित होने का मौका मिलता है। इससे आत्म-ज्ञान बढ़ता है। अधिकतर लोग वृद्धावस्था में तीर्थ यात्रा पर जाते हैं, लेकिन जो लोग युवावस्था में यह तीर्थ यात्रा पूरी कर लेते हैं, उन्हें परम ज्ञान की प्राप्ति होती है।

तीर्थयात्रा में व्यक्ति को अधिकतर समय पैदल चलना पड़ता है। इससे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है और ऐसा करने से आयु बढ़ती है। इसलिए शास्त्रों में भी कहा गया है कि जो लोग चार धाम यात्रा पर जाते हैं, उन्हें स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान मिलता है और वे जीवन भर कई तरह की शारीरिक समस्याओं से दूर रहते हैं।

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