विज्ञापन
Home  dharm  chandra grahan 2025 why are tulsi leaves not plucked during lunar eclipse

Lunar Eclipse 2025: चंद्रग्रहण के दौरान क्यों नहीं तोड़े जाते हैं तुलसी के पत्ते, जानें धार्मिक मान्यता

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Chandra Grahan: तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि धर्म, आस्था और पवित्रता का प्रतीक है। चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण लगने से पूर्व ही तुलसी दल का संग्रह कर लेना चाहिए। इस परंपरा का पालन करने से पूजा की शुद्धता बनी रहती है और तुलसी माता की कृपा सदैव प्राप्त होती है।
 

चंद्रग्रहण के दौरान क्यों नहीं तोड़े जाते हैं तुलसी के पत्ते, जानें धार्मिक मान्यता
Lunar Eclipse 2025 Tulsi Upay: हिंदू धर्म में तुलसी को माता के रूप में पूजा जाता है। इसे केवल एक पौधा नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। तुलसी का पत्ता भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, इसलिए किसी भी पूजा-अर्चना में इसका विशेष महत्व होता है। किंतु शास्त्रों में कुछ समय ऐसे बताए गए हैं जब तुलसी के पत्ते तोड़ना निषेध माना गया है। इन्हीं में से एक है चंद्रग्रहण। आइए जानते हैं कि आखिर चंद्रग्रहण के दौरान तुलसी पत्ते क्यों नहीं तोड़े जाते और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है।

तुलसी का पवित्र महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय लक्ष्मीजी का अवतार हुआ था और उसी समय तुलसी की भी उत्पत्ति मानी जाती है। तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी माना गया है। यही कारण है कि बिना तुलसी दल के श्रीहरि की पूजा अधूरी मानी जाती है। तुलसी के पत्ते न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं।

ग्रहण काल का महत्व

चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण को हिंदू धर्म में विशेष काल माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण काल के दौरान नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है। इस समय वातावरण में सूक्ष्म अशुद्धियां फैलती हैं, जिनका असर मनुष्य और प्रकृति दोनों पर पड़ता है। इसलिए इस अवधि में अनेक धार्मिक और दैनिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

ग्रहण काल में तुलसी तोड़ने की मनाही

ग्रहण के समय तुलसी के पत्ते तोड़ना अपवित्र माना गया है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्रमा की किरणों में विकृति आ जाती है। इन अशुद्ध किरणों का प्रभाव पृथ्वी पर उपस्थित पौधों और जड़ी-बूटियों पर पड़ता है। यदि इस समय तुलसी पत्ते तोड़े जाएं तो वे पवित्रता खो देते हैं और पूजा में उपयोग योग्य नहीं रहते।

धार्मिक मान्यता

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण काल में तुलसी माता विश्राम करती हैं। इस समय यदि उनके पत्ते तोड़े जाएं तो यह उनकी अवहेलना और अपमान माना जाता है। इसलिए तुलसी पत्तों का संग्रह ग्रहण से पहले ही कर लेना चाहिए। साथ ही, ग्रहण लगने से पूर्व ही तुलसी पर कुशा या तुलसी दल रख देने की परंपरा भी है, ताकि ग्रहण की अशुद्धि का असर उस पर न हो।

ये भी पढ़ें - चंद्रग्रहण के दौरान क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिर? जानें धार्मिक मान्यता

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel