facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  chaitra navratri ke dusre din kare maa brahmacharini ki puja janiye sanpurn pujan vidhi aur dharmik mahatva

Maa Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें संपूर्ण पूजन विधि व महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Maa Brahmacharini Pujan: मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा स्वरूप हैं। इनका नाम ब्रह्म और चारिणी शब्दों से मिलकर बना है। ब्रह्म का अर्थ तप या ज्ञान है, तथा चारिणी का अर्थ उसका आचरण करने वाली है।

Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्ति प्राप्ति का समय माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाला यह नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का महान अवसर है। इन नौ दिनों में प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना का विशेष महत्व है। इस रूप में देवी तपस्या, संयम और ब्रह्मचर्य का प्रतीक हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा से जीवन में तप, त्याग और सदाचार की वृद्धि होती है तथा हर क्षेत्र में सफलता और विजय प्राप्त होती है। ऐसे में चलिए जानते चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की संपूर्ण पूजन विधि, उनके धार्मिक महत्व, कथा, मंत्र और आरती के बारे में जानेंगे...

मां ब्रह्मचारिणी का दिव्य स्वरूप

मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा स्वरूप हैं। इनका नाम ब्रह्म और चारिणी शब्दों से मिलकर बना है। ब्रह्म का अर्थ तप या ज्ञान है, तथा चारिणी का अर्थ उसका आचरण करने वाली है। अर्थात मां ब्रह्मचारिणी तपस्या का पालन करने वाली देवी हैं। इनका स्वरूप अत्यंत सौम्य और दिव्य है। दाहिने हाथ में जपमाला तथा बाएं हाथ में कमंडलु लिए हुए ये दिखाई देती हैं। इनके शरीर का रंग गौर वर्ण का है। ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और पुष्पों से अलंकृत रहती हैं। इनका तीसरा नेत्र भी सुशोभित होता है। मां ब्रह्मचारिणी अन्य नामों से भी जानी जाती हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इनका स्वरूप इतना शांत और सादा है कि भक्तों को तुरंत वरदान देने वाली इनकी छवि मन में शांति भर देती है। इनके पूजन से भक्तों में एकाग्रता, बुद्धि और नैतिकता का विकास होता है। मां ब्रह्मचारिणी को चमेली का फूल अत्यंत प्रिय है तथा सफेद या सुगंधित फूल इनकी पूजा में चढ़ाए जाते हैं।

ब्रह्मचारिणी माता की पावन कथा

मां ब्रह्मचारिणी की कथा अत्यंत प्रेरणादायक और तपस्या की मिसाल है। कथा के अनुसार ये देवी पार्वती का अविवाहित रूप हैं। पूर्व जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर इनका जन्म हुआ था। नारद मुनि के उपदेश से प्रभावित होकर इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या आरंभ की। पहले एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल और फूल खाकर तप किया। फिर सौ वर्षों तक केवल शाकाहारी भोजन पर निर्वाह किया और जमीन पर सोती रहीं। वर्षा, धूप और कड़ाके की ठंड की कोई परवाह किए बिना इन्होंने तपस्या जारी रखी।

तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शंकर की आराधना की। अंत में बिल्व पत्र भी छोड़ दिया और निर्जल निराहार रहकर तपस्या करने लगीं। कठोर तपस्या से इनका शरीर क्षीण हो गया। इस कारण इन्हें अपर्णा नाम से भी पुकारा गया। ऋषि मुनि, देवता और सिद्ध पुरुष इनकी तपस्या देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा कि आज तक किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की। देवी की मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी और महादेव उन्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। 

 

Chaitra Navratri 2026

धार्मिक महत्व और पूजा के लाभ

मां ब्रह्मचारिणी का धार्मिक महत्व असीम है। इनकी पूजा से भक्तों को तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है। जीवन के कठिन समय में भी मन कर्तव्य पथ से नहीं भटकता। देवी अपनी कृपा से भक्तों की मलिनता, दुर्गुण और दोषों का नाश करती हैं। इनकी उपासना से सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। कार्यों में सफलता मिलती है तथा रुकावटें दूर हो जाती हैं।

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है, आत्मिक शांति प्राप्त होती है और सौभाग्य का वास होता है। भक्तों में ज्ञान, बुद्धि और नैतिक बल की वृद्धि होती है। इनकी आराधना से हर प्रकार की परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कन्याओं का पूजन भी किया जाता है, जिनका विवाह तय हो चुका हो, लेकिन शादी नहीं हुई हो। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्त दीर्घायु होते हैं और घर परिवार में सुख समृद्धि आती है। पूजा के दौरान भक्तों का मन शुद्ध और एकाग्र रहता है जिससे पूरे नवरात्रि में शक्ति का संचार होता है।

पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधिवत करने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री जुटानी चाहिए। इनमें सफेद या सुगंधित फूल, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, चंदन, रोली, पंचामृत, घी, कपूर, पान, सुपारी, शक्कर या चीनी से बना भोग, जपमाला, कमंडलु की प्रतिमा या चित्र, दीपक, धूप और गंगा जल शामिल हैं। कलश स्थापना के लिए भी जल, दूध, दही, शहद, घी और मिश्री की जरूरत पड़ती है। भक्तों को स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। पूजा स्थल को साफ करके गंगा जल से शुद्ध करना चाहिए। यदि घर में मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र है तो उसी के सामने पूजा की जा सकती है। सभी सामग्री शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए ताकि पूजा पूर्ण फल दे।

 

Chaitra Navratri 2026

संपूर्ण पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगा जल छिड़ककर शुद्ध करें। दीपक जलाएं। पहले कलश देवता और भगवान गणेश का पूजन करें। गणेश जी को फूल, अक्षत और रोली चढ़ाएं तथा भोग लगाएं। फिर कलश, नवग्रह, नगर देवता और ग्राम देवता की पूजा करें। अब मां ब्रह्मचारिणी की ओर ध्यान केंद्रित करें।

हाथ में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना मंत्र बोलें। पंचामृत से स्नान कराएं। फिर अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, फूल, चंदन अर्पित करें। कमल या चमेली का फूल विशेष रूप से चढ़ाएं। प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। पान सुपारी भेंट करें। तीन बार प्रदक्षिणा करें। अंत में घी और कपूर से आरती करें। क्षमा प्रार्थना के साथ पूजा समाप्त करें तथा प्रसाद सभी को बांट दें। पूजा में पूर्ण श्रद्धा और शुद्ध मन रखना आवश्यक है।

मंत्र जप और प्रार्थना

मुख्य प्रार्थना मंत्र- दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
ध्यान मंत्र- वन्दे वाञ्छित लाभाय चन्द्रार्ध कृत शेखराम जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम।
वंदना मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
बीज मंत्र- ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।
 
navratri

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। 
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। 
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। 
ज्ञान सभी को सिखलाती हो। 
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। 

जिसको जपे सकल संसारा। 
जय गायत्री वेद की माता। 
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। 

कमी कोई रहने न पाए। 
कोई भी दुख सहने न पाए। 
उसकी विरति रहे ठिकाने। 

जो तेरी महिमा को जाने। 
रुद्राक्ष की माला ले कर। 
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। 
आलस छोड़ करे गुणगाना। 
मां तुम उसको सुख पहुंचाना। 
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। 
पूर्ण करो सब मेरे काम। 
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। 
रखना लाज मेरी महतारी। 

प्रिय भोग

भोग के रूप में मां को शक्कर या चीनी से बनी वस्तुएं अर्पित करें। मान्यता है कि इससे दीर्घायु प्राप्त होती है। भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान कर दें।


यह भी पढ़ें-

Chaitra Navratri 2026: इस बार पालकी से आ रही हैं दुर्गा मां, जानें किस सवारी पर सवार होकर होंगी विदा? 

Navratri: नवरात्रि में क्यों चढ़ाया जाता है माता दुर्गा को लाल फूल , जानिए धार्मिक महत्व 

Chaitra Navratri: नवरात्रि में कैसे निर्धारित होता है मां दुर्गा का वाहन? जानें धार्मिक महत्व और मान्यताएं 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel