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Maa Kaalratri: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की ये आरती, साथ ही करें इस भजन का गान

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Maa Kalaratri Bhajan And Aarti: नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है- वह भयंकर रूप वाली देवी जो काले वस्त्रों से सुशोभित हैं।

Maa Kaalratri Ki Aarti

मां कालरात्रि की आरती
(Maa Kaalratri Ki Aarti) 


कालरात्रि जय जय महाकाली
काल के मुंह से बचाने वाली 
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा 
महा चंडी तेरा अवतारा 

पृथ्वी और आकाश पर सारा 
महाकाली है तेरा पसारा 
खंडा खप्पर रखने वाली 
दुष्टों का लहू चखने वाली 

कलकत्ता स्थान तुम्हारा 
सब जगह देखूं तेरा नजारा 
सभी देवता सब नर नारी 
गावे स्तुति सभी तुम्हारी 

रक्तदंता और अन्नपूर्णा 
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी 
ना कोई गम ना संकट भारी 

उस पर कभी कष्ट ना आवे 
महाकाली मां जिसे बचावे 
तू भी 'भक्त' प्रेम से कह 
कालरात्रि मां तेरी जय

मां कालरात्रि का भजन
(Maa Kaalratri Ka Bhajan)


सातवां जब नवरात्र हो आनंद ही छा जाता।
अन्धकार सा रूप ले पुजती हो माता॥
गले में विद्युत माला है, तीन नेत्र प्रगटाती।
धरती क्रोधित रूप माँ चैन नहीं वो पाती॥

गर्दब पर वो बैठ कर पाप का भोज उठाती।
धर्म की रखती मर्यादा विचलित सी हो जाती॥
भूत प्रेत को दूर कर निर्भयता है लाती।
योगिनिओं को साथ ले धीरज वो दिलवाती॥

शक्ति पाने के लिए तांत्रिक धरते ध्यान।
मेरे जीवन में भी दो हलकी सी मुस्कान॥
नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ।
नवरात्रों की माँ कृपा कर दो माँ॥

जय माँ कालरात्रि।
जय माँ कालरात्रि॥

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