Chaitra Navratri Kanya Pujan 2025: नवरात्रि में दुर्गा माता की पूजा का विशेष महत्व है और कन्या पूजन को एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है।
Chaitra Navratri Kanya Pujan 2025: नवरात्रि में दुर्गा माता की पूजा का विशेष महत्व है और कन्या पूजन को एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। कन्याओं को देवी का रूप मानकर कन्या पूजन किया जाता है, लेकिन अगर इस दौरान कुछ गलतियां हो जाएं तो इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए कन्या पूजन में कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आइए जानते हैं वो नियम क्या हैं।
स्थान का ध्यान रखें
जिस स्थान पर आपको कन्या पूजन करना है, वो स्थान साफ और पवित्र होना चाहिए। गंदे या अव्यवस्थित स्थान पर कन्या पूजन करने से देवी का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है। इसलिए कन्या पूजन से पहले पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ कर लें।
बिना नहाए कन्या पूजन न करें
जिस तरह किसी भी देवी-देवता की पूजा करने से पहले स्नान करना जरूरी होता है, उसी तरह कन्या पूजन से पहले भी साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। कन्या पूजन से पहले स्वयं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर आई कन्याओं के हाथ-पैर धुलवाएं।
कन्याओं की संख्या इतनी होनी चाहिए
धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन के लिए हमेशा 2, 5, 7 या 9 कन्याओं को आमंत्रित करना शुभ माना जाता है। विषम संख्या जैसे 1, 3, 6 या 8 कन्याओं का पूजन करना अनुचित माना जाता है। इसलिए कन्या पूजन के लिए हमेशा 2, 5, 7 या 9 कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए।
बुरा व्यवहार न करें
कन्या पूजन के दौरान क्रोध, अहंकार या नकारात्मक विचार अपने मन में न आने दें। कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है, इसलिए उनके प्रति असम्मानजनक व्यवहार न करें और उनसे सम्मानपूर्वक बात करें। पूरी श्रद्धा और प्रेम से कन्याओं की सेवा और पूजा करें।
कन्याओं को खाली हाथ न जाने दें
कन्या पूजन के बाद उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार उपहार, दक्षिणा, फल या वस्त्र देना चाहिए। कन्या पूजन के बाद कभी भी कन्याओं को खाली हाथ नहीं भेजना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और ऐसा करने से देवी दुर्गा अप्रसन्न हो सकती हैं।