।। माता लक्ष्मी का भजन (Mata Lakshmi Ka Bhajan) ।।
घर में पधारो लक्ष्मी मैया मेरे घर में पधारो
(Ghar Mein Padharo Lakshmi Maiya Mere Ghar Mein Padharo)
घर में पधारो लक्ष्मी मैया मेरे घर में पधारो ||
कष्ट निवारो लक्ष्मी मैया मेरे घर में पधारो ||
सुख और वैभव तुमसे आता,
दर्शन से संकट टल जाता,
भक्तों के भाग जगा दो मेरी लक्ष्मी मैया ||
आप भी आना रिद्धि सिद्धि लाना,
गणपति कुबेर को लाना मेरी लक्ष्मी मैया ||
जिस घर तुम रहती हो मैया,
उस घर के भंडारे भरती,
दुखियो के कष्ट निवारो मेरी लक्ष्मी मैया ||
जो भी माँ की शरण में जाए,
सब सुख पायें धन्य हो जाये,
संकट दूर भगा दो मेरी लक्ष्मी मैया ||
हम भी तुम्हारे भक्त हैं मैया,
कबसे पुकारे सुनलो मैया,
बेड़ा पार लगा दो मेरी लक्ष्मी मैया ||
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मैं नाम कमाऊं जग में,
(Mein NaaM Kamaun Jag Mein)
मैं नाम कमाऊं जग में,
बड़ा बन जाऊं धनवान,
हे माँ लक्ष्मी हमको भी दे दो ये वरदान,
ये लो बता दो माँ लक्ष्मी कैसे खुश तुमको करना है,
मुझको भी अपना जीवन बस खुशियों से ही भरना है,
मुझपे भी कृपा कर दो माँ लक्ष्मी कृपा निधान,
हे माँ लक्ष्मी हमको भी दे दो ये वरदान.....
जिसपे तुम्हारी कृपा हो जाती वो तो तर जाता है,
तुमको जो है पूजता जीवन खुशियों से भर जाता है,
दिन रात तुम्हारा करता माँ लक्ष्मी मैं गुणगान,
हे माँ लक्ष्मी हमको भी दे दो ये वरदान.....
धन कुबेर के माँ लक्ष्मी तुम से ही खजाने मिलते है,
आपने चरण जहां पड़ते खुशियों के कमल वहां खिलते है,
तुम ममता का सागर हो माँ लक्ष्मी हो दयावान,
हे माँ लक्ष्मी हमको भी दे दो ये वरदान....
चरणों तुम्हारे विनती है करुणा भरी दृष्टि कर दो माँ,
दूर करो विपदा मेरी मेरे भंडारे भर दो माँ,
मेरी भी इस दुनिया में बड़ी ऊची कर दो शान,
हे माँ लक्ष्मी हमको भी दे दो ये वरदान.....
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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
(Om Jay Lakshmi Mata Maiya Jai Lakshmi Mata)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता ।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥