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Bhagvan Shiv Story: भगवान शिव ने पंचतत्वों को कब और क्यों त्यागा, जानिए कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Bhagvan Shiv Story: अमरनाथ गुफा और वहाँ बनने वाले प्राकृतिक हिमशिवलिंग का हिंदू धर्म में सर्वोच्च स्थान है। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि उस परम सत्य का प्रकटीकरण है जहाँ भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था।

Bhagvan Shiv Story:
Bhagvan Shiv Story: अमरनाथ गुफा और वहाँ बनने वाले प्राकृतिक हिमशिवलिंग का हिंदू धर्म में सर्वोच्च स्थान है। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि उस परम सत्य का प्रकटीकरण है जहाँ भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि भगवान शिव ने पंचतत्वों को कब और क्यों त्यागा था?" सनातन परंपरा और अमरनाथ महात्म्य के अनुसार, यह पूरी घटना उस समय की है जब महादेव माता पार्वती को 'अमर कथा' सुनाने के लिए एक अत्यंत गुप्त स्थान की खोज में निकले थे।

पौराणिक कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती के मन में कौतूहल जागा। उन्होंने देखा कि भगवान शिव के गले में मुंडों की एक माला सुशोभित है। माता पार्वती ने कौतुकवश महादेव से पूछा, "हे स्वामी! आप अपने गले में इन मुंडों की माला क्यों धारण करते हैं?" भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "देवी! इस माला में जितने भी मुंड हैं, वे सब तुम्हारे ही हैं।"यह सुनकर पार्वती जी आश्चर्यचकित रह गईं और बोलीं, "यह कैसे संभव है प्रभु? मैं तो आपके सामने जीवित बैठी हूँ।"

तब शिव जी ने गंभीर होकर कहा, "हे पार्वती! यह तुम्हारे विभिन्न जन्मों के प्रतीक हैं। जब-जब तुम शरीर त्यागती हो, मैं तुम्हारे प्रेम में तुम्हारे शीश को इस माला में पिरो लेता हूँ। मुझे अमर होने के कारण कभी शरीर नहीं बदलना पड़ता, परंतु तुम्हें हर बार नया शरीर धारण करना पड़ता है।" माता पार्वती ने व्याकुल होकर पूछा, "हे नाथ! ऐसा क्यों है कि आप अमर हैं और मुझे बार-बार मृत्यु और जन्म के इस चक्र से गुजरना पड़ता है? क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मैं भी अमर हो जाऊँ?"

पार्वती जी की तीव्र जिज्ञासा और प्रेम को देखकर महादेव ने उन्हें वह 'अमर कथा' सुनाने का निर्णय लिया, जिसे जानने के बाद कोई भी जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

पंचतत्वों का त्याग कब और क्यों?

भगवान शिव जब माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए तैयार हुए, तो सबसे बड़ी चुनौती एक अत्यंत गुप्त और एकांत स्थान खोजने की थी।अमर कथा कोई साधारण कहानी नहीं थी। यह ब्रह्मांड के परम सत्य और अमरत्व का ज्ञान था। यदि इस कथा को कोई भी साधारण जीव, पशु, पक्षी या यहाँ तक कि प्रकृति का कोई तत्व भी सुन लेता, तो वह अमर हो जाता। इससे सृष्टि का नियम और संतुलन बिगड़ जाता, क्योंकि प्रकृति का नियम ही परिवर्तन और मृत्यु है। इसलिए, महादेव को एक ऐसे स्थान पर जाना था जहाँ पूरी तरह से शून्यता हो। अमरत्व की इस परम विद्या को प्रकट करने के लिए महादेव को सांसारिक और भौतिक बंधनों से परे जाना था। यही कारण था कि उन्होंने अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ते हुए मार्ग में अपने सभी आभूषणों, गणों और अंततः शरीर के 'पंचतत्वों' का त्याग कर दिया, ताकि वे शुद्ध चैतन्य रूप में कथा कह सकें।महादेव ने काशी (या कैलाश) से अमरनाथ गुफा की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में उन्होंने अपनी प्रिय वस्तुओं और तत्वों को एक-एक करके पीछे छोड़ दिया। आज भी अमरनाथ यात्रा के मार्ग में इन स्थानों के साक्ष्य मिलते हैं:

नंदी का त्याग (पहलगाम):यात्रा की शुरुआत में महादेव ने अपने प्रिय वाहन 'नंदी' को जिस स्थान पर छोड़ा, उसे आज पहलगाम  कहा जाता है।
चंद्रमा का त्याग (चंदनबाड़ी): शिव जी के जटाओं में साक्षात चंद्रमा वास करते हैं। उन्होंने चंद्रमा को जिस स्थान पर उतारा, वह चंदनबाड़ी कहलाया।
सर्पों का त्याग (शेषनाग):महादेव के गले में लिपटे रहने वाले नागों को उन्होंने जहाँ छोड़ा, वह स्थान शेषनाग झील के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
पुत्र गणेश का त्याग (महागुणास पर्वत): उन्होंने अपने पुत्र श्री गणेश को जिस पर्वत पर रुकने की आज्ञा दी, उसे गणेश टॉप कहा जाता है।
पंचतत्वों का त्याग (पंचतरणी):सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गुफा से कुछ मील पहले आया, जिसे पंचतरणी कहा जाता है। यहाँ महादेव ने प्रकृति के पाँचों तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को खुद से अलग कर दिया। उन्होंने इन पाँचों तत्वों को पाँच धाराओं के रूप में वहाँ प्रवाहित कर दिया।

तत्वज्ञान का रहस्य:पंचतत्वों को त्यागने का अर्थ था कि महादेव ने अपने स्थूल (भौतिक) स्वरूप को पूरी तरह समेट लिया और पूरी तरह 'सूक्ष्म' एवं 'परम प्रकाश' रूप में आ गए। अमर कथा को ग्रहण करने के लिए भौतिक शरीर की सीमाएं बाधक थीं, इसलिए पंचतरणी पर यह अलौकिक त्याग हुआ।

 अमरनाथ गुफा में प्रवेश और कथा का आरंभ

पंचतत्वों का त्याग करने के बाद, पूर्णतः दिगंबर और शुद्ध आत्मस्वरूप में भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ अमरनाथ की पवित्र गुफा में प्रवेश किया। गुफा में पहुँचकर महादेव ने एक अद्भुत लीला की। उन्होंने चारों ओर देखा कि कहीं कोई जीव छिपा तो नहीं है। पूर्ण आश्वस्त होने के लिए उन्होंने अपनी शक्ति से गुफा के चारों ओर अग्नि का एक घेरा बना दिया, ताकि कोई भी जीवित प्राणी भीतर न आ सके। इसके बाद उन्होंने एक व्याघ्र चर्म  बिछाई और समाधिस्थ होकर माता पार्वती को 'अमर कथा' सुनाना प्रारंभ किया।महादेव कथा सुनाते जा रहे थे और माता पार्वती ध्यानपूर्वक सुनते हुए बीच-बीच में "हाँ, हूँ"* की हुंकार भर रही थीं, जिससे शिव जी को ज्ञात होता रहे कि माता जाग रही हैं और कथा सुन रही हैं।

जब कथा अपने अंतिम चरण में थी, तब माता पार्वती को थकान के कारण नींद आ गई। वे गहरी निद्रा में सो गईं, परंतु महादेव अपनी समाधि में लीन थे और कथा अनवरत कह रहे थे।उसी समय, व्याघ्र चर्म के नीचे एक तोते (शुक) का अंडा छिपा रह गया था। अग्नि के प्रभाव से वह अंडा फूट चुका था और उसमें से एक छोटा सा शुक सावक (तोते का बच्चा) निकल आया था। जब माता पार्वती सो गईं, तो उस छोटे से शुक ने माता की जगह "हाँ, हूँ" की हुंकार भरना शुरू कर दिया। भगवान शिव समझे कि पार्वती जी ही कथा सुन रही हैं, और उन्होंने पूरी अमर कथा समाप्त कर दी।कथा समाप्त होने पर जब महादेव ने आँखें खोलीं, तो उन्होंने देखा कि पार्वती जी तो सो रही हैं। तब उन्होंने आश्चर्य से पूछा, "यदि तुम सो रही थीं, तो हुंकार कौन भर रहा था?"

तभी महादेव की दृष्टि उस नन्हे तोते पर पड़ी। महादेव को अत्यंत क्रोध आया कि एक पक्षी ने इस परम गुप्त अमर कथा को सुन लिया है। नियम के विरुद्ध कोई अमर हो जाए, यह सृष्टि के लिए उचित नहीं था। क्रोधित शिव अपना त्रिशूल लेकर उस तोते को मारने के लिए दौड़े।

वह तोता जान बचाने के लिए तेजी से उड़ा और भागते-भागते व्यास जी के आश्रम में पहुँच गया। वहाँ महर्षि व्यास की पत्नी 'वटिका' जँभाई ले रही थीं। वह सूक्ष्म रूप धरकर उनके खुले मुख के रास्ते उनके पेट में प्रवेश कर गया। भगवान शिव वहाँ पहुँचे, परंतु गर्भ में छिपे जीव पर त्रिशूल चलाना धर्म के विरुद्ध था, इसलिए वे लौट गए।यही तोता बाद में व्यास जी के पुत्र के रूप में जन्मा, जिन्हें हम **महर्षि शुकदेव** के नाम से जानते हैं। गर्भ में ही अमर कथा सुन लेने के कारण वे जन्म से ही परम ज्ञानी और मुक्त पुरुष थे।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)


 

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