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Bahula Chauth 2025: बहुला चौथ मनाने की कैसे शुरू हुई परंपरा, जानें क्या है पूजा का विधान और रहस्य

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Bahula Chauth Puja: बहुला चौथ का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस साल बहुला चौथ 12 अगस्त, मंगलवार को है।

बहुला चौथ मनाने की कैसे शुरू हुई परंपरा, जानें क्या है पूजा का विधान और रहस्य
Bahula Chauth 2025 Importance: हिन्दू धर्म में बहुला चौथ का पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से अपनी संतान की सुख-शांति, लंबी आयु और समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह पर्व बहुला नामक गाय की सत्यनिष्ठा और भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ा है। इस साल, बहुला चौथ 12 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। बहुला चौथ की परंपरा एक पौराणिक कथा से जुड़ी है, जिसमें भगवान कृष्ण और बहुला नाम की एक गाय की कहानी है।

कैसे शुरू हुई परंपरा?

बहुला की परीक्षा

एक बार नंद बाबा की गौशाला में बहुला नाम की एक गाय थी, जिसे भगवान कृष्ण बहुत पसंद करते थे। एक दिन भगवान कृष्ण ने बहुला की परीक्षा लेने का विचार किया। जब वह वन में घास चर रही थी, तब भगवान ने सिंह (शेर) का रूप धारण किया और उसके सामने आ गए।

सत्यनिष्ठा का वचन

बहुला गाय डर गई, लेकिन फिर भी उसने हिम्मत से कहा कि हे वनराज, मेरा बछड़ा गौशाला में भूखा है। मैं उसे एक बार दूध पिलाकर वापस आ जाऊंगी, तब आप मुझे खा लेना।" बहुला ने सत्य और धर्म की शपथ ली।

वरदान

बहुला की इस बात से प्रभावित होकर सिंह रूपी भगवान कृष्ण ने उसे जाने दिया। बहुला ने वापस आकर अपने बछड़े को दूध पिलाया और उसे दुलारकर वापस सिंह के पास लौट आई। उसकी सत्यनिष्ठा देखकर भगवान कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और अपने असली रूप में आ गए। उन्होंने बहुला को वरदान दिया कि कलयुग में जो भी इस दिन तुम्हारी पूजा करेगा, उसकी संतान हमेशा सुखी और सुरक्षित रहेगी। इसी घटना के बाद से बहुला चौथ का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

पूजा का विधान

  • बहुला चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार रहें या फलाहार कर सकते हैं।
  • शाम को गाय और उसके बछड़े की पूजा करें। अगर घर में गाय नहीं है, तो मिट्टी की गाय और बछड़े की प्रतिमा बनाकर पूजा कर सकते हैं।
  • गाय के साथ-साथ भगवान गणेश और भगवान कृष्ण की भी पूजा की जाती है। उन्हें दूर्वा, मोदक, और माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
  • गाय को भी गुड़, चना और गेहूं का भोग लगाएं और रात में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें और फिर व्रत का पारण करें।

रहस्य और धार्मिक मान्यता

बहुला चौथ का व्रत संतान की सुख-शांति और दीर्घायु के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन दंपतियों को संतान की इच्छा होती है, वे भी यह व्रत रखते हैं। इस दिन गाय का दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को जीवन के सभी लौकिक और पारलौकिक सुख प्राप्त होते हैं।

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