Akshaya Tritiya 2025: भक्त और भगवान के बीच एक अलग ही रिश्ता होता है। भक्त भगवान के बिना नहीं रह सकता। भगवान भक्त के बिना नहीं रह सकते। इसी तरह श्री लाडली जी महाराज को भगवान श्री कृष्ण की प्रेयसी के रूप में जाना जाता है।
Akshaya Tritiya 2025: भक्त और भगवान के बीच एक अलग ही रिश्ता होता है। भक्त भगवान के बिना नहीं रह सकता। भगवान भक्त के बिना नहीं रह सकते। इसी तरह श्री लाडली जी महाराज को भगवान श्री कृष्ण की प्रेयसी के रूप में जाना जाता है। लाडली जी महाराज और बांके बिहारी एक शरीर माने जाते हैं।
लाडली जी और भगवान श्री कृष्ण को एक प्राण माना जाता है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी को राधा रानी के स्वरूप में देखा जाता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी जी अपने पैरों में पायल पहनते हैं। साल के इस एक दिन भगवान बांके बिहारी को राधा रानी के रूप में देखा जाता है। इस रूप को सुंदर बनाने के लिए उनका बहुत उत्साह से श्रृंगार किया जाता है।
पूरे शरीर पर चंदन
भगवान बांके बिहारी इस दिन राधा के रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। बांके बिहारी मंदिर के पुजारी का कहना है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी अपने पैरों में पायल पहनते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व बहुत ही पवित्र होता है। इस दिन राधा कृष्ण दो शरीर और एक आत्मा बन जाते हैं। उनके चरणों में चंदन की टिकिया रखी जाती है। पूरे शरीर पर चंदन लगाया जाता है।
कहा जाता है कि करीब 500 साल पहले स्वामी हरिदास जी ने भगवान बांके बिहारी की मूर्ति को गर्मी से बचाने के लिए चंदन का लेप लगाया था। बाद में यह परंपरा बन गई। अक्षय तृतीया पर किए गए पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाते, वे चिरस्थायी हो जाते हैं। इस दिन दान करना और आभूषण खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। यह भी पढ़ें- Lord Ganesha: आखिर भगवान शिव ने क्यों काटा अपने ही पुत्र गणेश का सिर, जानें पौराणिक कथा
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