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Hanuman Janmotsav 2025: हनुमानजी जन्मोत्सव आज, ये आरती करने से मिलता है पूजा का फल

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Hanuman Jayanti 2025 : हनुमान जी संकटों को दूर करने वाले देवता हैं. शास्त्रों में हनुमान जी को शिव का अवतार बताया गया है.

Hanuman Jayanti 2025

Hanuman Janmotsav 2025: हनुमान जी संकटों को दूर करने वाले देवता हैं. शास्त्रों में हनुमान जी को शिव का अवतार बताया गया है. जब व्यक्ति हर तरह से अपने आपको हारा हुआ महसूस करने लगें. जीवन में असफलताएं उसका पीछा नहीं छोड़ रही हैं. पग-पग पर बाधाएं और परेशानियां मुंह बाए खड़ी हों तो ऐसे में हनुमान जी की ये आरती राहत प्रदान कर सकता है. ये आरती है    -

हनुमान जयंती पूजा विधि (Hanuman Jayanti Puja vidhi)

हनुमान जयंती के दिन स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं और फिर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। इससे माता लक्ष्मी और बजरंगबली प्रसन्न होते हैं। अब पीपल के पत्ते पर सिंदूर से श्री राम लिखकर बजरंगबली को अर्पित करें। पवित्र धागा पहनें, प्रसाद के रूप में मोतीचूर के लड्डू चढ़ाएं। एक नारियल पर सिंदूर लगाएं और मौली बांधकर अपनी मनोकामना कहते हुए हनुमान जी के चरणों में अर्पित करें। मान्यता है कि इससे हर संकट दूर होता है। तेल का दीपक जलाएं और हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें और फिर आरती करें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें। इस दिन हवन करना बहुत शुभ माना जाता है।

हनुमान जयंती मंत्र (Hanuman Jayanti Mantra)

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।'
'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्।'
'ॐ नमो भगवते हनुमते नम:।'
'ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा।'
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥

Hanuman Janmotsav 2025

श्री हनुमानजी आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

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