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Puja Room Vastu: घर में पूजा रूम की दिशा बदल सकती है आपकी किस्मत, सही दिशा से सुधर जाएगा जीवन

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Puja Room Vastu: हर घर में एक कोना ऐसा जरूर होता है जहां मन को शांति मिलती है, जहां बैठकर व्यक्ति खुद से जुड़ता है, वो जगह है पूजा कक्ष, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा की दिशा भी हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती है?

Puja Room Vastu
Puja Room Vastu: हर घर में एक कोना ऐसा जरूर होता है जहां मन को शांति मिलती है, जहां बैठकर व्यक्ति खुद से जुड़ता है, वो जगह है पूजा कक्ष, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा की दिशा भी हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती है? अगर नहीं, तो अब यह समझना जरूरी है कि पूजा कक्ष की सही दिशा क्यों मायने रखती है। तो आइए इस खबर में पूजा कक्ष से जुड़े वास्तु नियमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

पूजा कक्ष के लिए सबसे अच्छी दिशा

पूजा कक्ष के लिए सबसे अच्छी जगह घर की उत्तर-पूर्व दिशा मानी जाती है। इस दिशा को ईशान कोण भी कहा जाता है और यही वो क्षेत्र है जहां सूर्य की पहली किरण आती है। सुबह की ये हल्की और शांत रोशनी मन और वातावरण दोनों को सकारात्मक बनाती है, अगर आपके घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा कक्ष है, तो आप काफी हद तक मानसिक संतुलन और ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं। 

अगर उत्तर-पूर्व दिशा उपलब्ध नहीं है, तो उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या उत्तर-पूर्व और पूर्व के बीच का कोण भी अच्छा विकल्प माना जाता है। मान्यता है कि जो जातक इन  दिशाओं में विधि-विधान से पूजा-पाठ करते हैं उनका एकाग्रता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही घर का माहौल भी शांत और खुशहाल रहता है।

इन दिशाओं के अलावा अगर पूजा कक्ष किसी अन्य दिशा जैसे दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में है, तो आपको इसे स्थानांतरित करने का सुझाव दिया जाता है। ऐसा करने से न केवल मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, बल्कि जीवन में स्थिरता भी आती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि पूजा कक्ष ईंटों और पत्थरों से बना ढांचा ही हो। वास्तविक पूजा कक्ष वह स्थान है जहां आप नियमित रूप से बैठते हैं और भक्ति और मन से पूजा करते हैं। 

पूजा कक्ष के बारे में कुछ अन्य बातें 

1. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा करते समय हमेशा व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ये दिशा पूजा के लिए बेस्ट होती है।

2. मंदिर के पीछे दीवार पर खाली जगह नहीं होनी चाहिए, यानी मंदिर को दीवार से सटाकर रखना सही माना जाता है।

3. पूजा स्थल के पास शौचालय या रसोई न हो तो बेहतर है, इससे ऊर्जा साफ रहती है।

4. पूजा कक्ष में बहुत अधिक सजावट या चमक-दमक से बचना चाहिए। 

पूजा स्थल केवल घर की सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं होता, यह एक ऊर्जा केंद्र होता है। जब हम सही दिशा में बैठकर पूजा करते हैं तो हमारे विचार अधिक स्पष्ट होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।

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