विज्ञापन
Home  astrology  kundali dosh kitne prakar ke hote hain kundali dosh kaise pata karen kundali defect effects and remedies

Kundli Dosha: कितने प्रकार के होते हैं कुंडली दोष? कैसे करें पता, जानें इसके प्रभाव और उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर भविष्य के बारे में जाना जा सकता है, लेकिन कई बार आपने ज्योतिष शास्त्र को यह कहते हुए सुना होगा कि आपकी कुंडली में कोई दोष है जिसके कारण आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Kundli Dosha
kundali mein dosh kitne prakar ke hote hain: कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर भविष्य के बारे में जाना जा सकता है, लेकिन कई बार आपने ज्योतिष शास्त्र को यह कहते हुए सुना होगा कि आपकी कुंडली में कोई दोष है जिसके कारण आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह सुनकर आप सोचने लगते हैं कि ऐसा कौन सा दोष हो सकता है और ये दोष क्या हैं? तो आपको बता दें कि कुंडली में सभी ग्रहों ने अपना स्थान ग्रहण किया हुआ है, लेकिन उनकी दशा और दिशा के कारण कई बार ऐसा संयोग बनता है कि ग्रह अच्छे भाव या भाव में होने पर भी अच्छा प्रभाव नहीं दे पाता है। कुंडली दोष के कई कारण होते हैं, जिसके कारण व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियां होती हैं।

कुंडली दोष कितने प्रकार के होते हैं? (kundali dosh kitne prakar ke hote hain?)

कुंडली दोष को नकारात्मक प्रभाव भी कहा जा सकता है। कुंडली में अपना स्थान लेते हुए सभी ग्रह अन्य ग्रहों को भी देखते हैं, जिसके कारण ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन होता है, इसके साथ ही राशि, ग्रह, नक्षत्र, दिशा और दशा का भी अपना विशेष प्रभाव होता है, जिसे देखकर कोई भी जातक अपने भविष्य के बारे में जान सकता है। लेकिन कई बार विशेष परिस्थितियों में भी कुंडली दोष लग जाता है। कुंडली दोष कई प्रकार के होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से पितृ दोष, नाड़ी दोष, मांगलिक दोष, लग्न दोष, भुकट दोष, काल सर्प दोष, केमद्रुम योग, गुरु चांडाल और दोष शापित दोष शामिल हैं।

कुंडली दोष क्यों होते हैं (kundali dosh Kyu Hote Hai)

ग्रहों के कारण व्यक्ति के जन्म के समय भी कुंडली दोष उत्पन्न हो सकते हैं या भविष्य में ग्रहों की स्थिति में परिवर्तन होने के कारण भी कुंडली दोष बन जाते हैं। कई बार कुंडली में दोष व्यक्ति के पिछले जन्मों के कर्मों के कारण भी उत्पन्न होते हैं, जिन्हें उपायों के माध्यम से कम भी किया जा सकता है। इसीलिए कहा जाता है कि व्यक्ति के कर्म उसका सात जन्मों तक साथ नहीं छोड़ते। लेकिन कुंडली दोष चाहे किसी भी प्रकार का हो, उसके लिए उपाय करना आवश्यक है, अन्यथा व्यक्ति का जीवन दुखों, परेशानियों, आर्थिक तंगी, भावनात्मक रूप से कमजोर और शारीरिक परेशानियों से घिरा रहता है। लेकिन उससे पहले यह जानना आवश्यक है कि व्यक्ति की कुंडली में कौन सा दोष स्थापित है।

कुंडली दोष कैसे पता करें? (kundali dosh Kase Pta Lage)

यह जानने के लिए कि कुंडली में कौन से दोष हैं, ग्रहों की चाल का व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, क्या दो ग्रहों के बीच कोई संबंध है, पाप ग्रहों की दृष्टि शुभ ग्रहों के प्रभाव को कम कर रही है। कुंडली में ऐसे कई योग बनते हैं। जो समय-समय पर जातक के जीवन को प्रभावित करते हैं। ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा और दशा और दिशा कुंडली दोष पर निर्भर करती है। इन दोषों का प्रभाव जन्मों तक और कभी-कभी तो अगली पीढ़ी तक भी रहता है।

क्या कुंडली दोष को दूर किया जा सकता है? (kundali dosh Kase Dur Kare)

कुंडली में दोष होने की बात जानकर लोग परेशान हो जाते हैं और उनके मन में कई सवाल उठते हैं कि क्या यह दोष कुंडली और जीवन में सिर्फ परेशानियां ही देता रहेगा और क्या ये सारी परेशानियां खत्म हो पाएंगी, तो आपको बता दें कि दोष से किसी भी तरह से मुक्ति पाई जा सकती है। ये दोष व्यक्ति के कर्मों से जुड़े होते हैं, जिन्हें कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर जाना जा सकता है। ऐसे में अगर यह पता चल जाए कि कौन सा ग्रह किस दोष और पिछले जन्म के कर्मों का बुरा असर दे रहा है, तो दोषों को दूर करने के उपाय किए जा सकते हैं। कुंडली दोष को दूर करने में ज्योतिष मदद कर सकता है।

कुंडली दोष से क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं? (kundali dosh Effects)

कुंडली में किसी भी तरह का दोष हो, व्यक्ति के जीवन में परेशानियां और बाधाएं हमेशा बनी रहती हैं। बने-बनाए व्यापार में अचानक घाटा हो जाता है, कोई नया काम शुरू करने में बाधा आती है, परिवार की सुख-शांति भंग हो जाती है, अविवाहित लोगों को भी शादी के लिए अच्छे रिश्ते नहीं मिलते और स्वास्थ्य संबंधी विकार बढ़ जाते हैं। ऐसा होने लगता है, संतान पक्ष से शुभ समाचार नहीं मिल रहा है, आदि। यह इस बात का संकेत है कि व्यक्ति की कुंडली में कोई दोष उत्पन्न हो रहा है।

इसके प्रभाव से व्यक्ति आर्थिक स्थिति से लेकर भावनात्मक रूप से भी कमजोर हो जाता है। दोषों के दुष्प्रभाव व्यक्ति को संतान प्राप्ति में भी बाधा डाल सकते हैं। वैवाहिक जीवन में अचानक कलह बढ़ जाना, दुर्घटनाएं होना भी कुंडली दोष होने की संभावना को बढ़ा देता है।

यह भी पढ़ें- 
Saptarshi Story: कौन हैं सप्तऋषि? जानिए इन महान ऋषियों की दिव्य गाथा

Kaise Hua Bali Aur Sugriv Ka Janm: कैसे हुआ बाली और सुग्रीव का जन्म? जानें क्या है पौराणिक कथा!
Lord Shiva and Mata Parvati story: आखिर क्यों दिया महादेव ने मां पार्वती को श्राप? जानें पौराणिक कथा

Hanuman Janmotsav 2025: आखिर हनुमान जी के भोग में क्यों अर्पित किया जाता है तुलसी पत्र? जानें पौराणिक कथा!

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel