धूमावती जयंती सनातन धर्म में दस महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या, मां धूमावती के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती हैयह त्योहार हर वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है मां धूमावती को दुख, दरिद्रता, और दुर्भाग्य का नाश करने वाली देवी माना जाता है पौराणिक कथा (प्राकट्य रहस्य)पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती कैलाश पर थीं और उन्हें बहुत तेज भूख लगी。 उन्होंने भगवान शिव से भोजन की याचना की, लेकिन शिवजी ने उनसे कुछ प्रतीक्षा करने को कहा。 जब भूख असहनीय हो गई और शिवजी ने भोजन नहीं दिया, तो माता पार्वती ने अपनी भूख शांत करने के लिए भगवान शिव को ही निगल लिया。 इसके फलस्वरूप, भगवान शिव के विष के प्रभाव से माता पार्वती के शरीर से धुआं निकलने लगा और उनका रूप धूमिल हो गया。 तब भगवान शिव ने उन्हें माया द्वारा बाहर निकाला और बताया कि धुएं के समान शरीर होने के कारण उनका नाम धूमावती होगा。 शिवजी ने उन्हें विधवा रूप में प्रकट होने का वरदान दिया
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