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Nag Panchami Katha: जब ऋषि पुत्र ने नागों को यज्ञ की अग्नि से बचाया, जानिए क्यों मनाते हैं नाग पंचमी?

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

सावन का महीना अपने साथ हरियाली, ठंडी फुहारें और भक्ति का अनुपम संगम लेकर आता है।

Nag Panchami 2025 Katha: सावन का महीना अपने साथ हरियाली, ठंडी फुहारें और भक्ति का अनुपम संगम लेकर आता है। इसी पवित्र मास में एक दिन ऐसा भी आता है, जब सम्पूर्ण सृष्टि के रक्षक माने जाने वाले नाग देवता की विशेष आराधना की जाती है। यह पर्व है नाग पंचमी, जो हमें प्रकृति और उसकी अदृश्य शक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है। मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से सर्पदोष, कालसर्प दोष, सर्प भय और विष संबंधी कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

जब भी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आती है, तो हमारी संस्कृति में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। गाँव-गाँव, शहर-शहर लोग नाग देवता की पूजा कर, उन्हें दूध चढ़ा, दूर्वा और कुश से उनका अभिषेक करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है – इस पूजा की कथा क्या है? क्यों हमारे पूर्वजों ने नागों को देवता का स्थान दिया? आज मैं आपको एक ऐसी कथा सुनाने जा रही हूँ, जिसमें वचन की मर्यादा, शाप की तीव्रता, और एक महान ऋषिपुत्र की करुणा का संगम है।

 

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