बामा खेपा 19वीं सदी के बंगाल के एक महान तांत्रिक, योगी और आध्यात्मिक गुरु थे। 'खेपा' का बंगाली में अर्थ 'पागल' होता है। मां तारा के प्रति उनकी दीवानगी के कारण उन्हें 'बामखेपा' (तारा मां का पागल बेटा) कहा गया। वह तंत्र की 'वामाचार' (Vamachara) पद्धति के सबसे प्रसिद्ध संतों में से एक माने जाते हैं। बीरभूम (पश्चिम बंगाल) का तारापीठ शमशान उनका मुख्य साधना स्थल था। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन यहीं बिताया। लोक मान्यताओं के अनुसार, उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि वह मां तारा को साक्षात देख सकते थे और उनसे बात करते थे। भक्त उन्हें भगवान शिव के उग्र रूप 'भैरव' का साक्षात अवतार मानते थे।
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