Maa Durga: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा को शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। आपने मां दुर्गा की ऐसी तस्वीरें जरूर देखी होंगी, जिनमें उनके कई हाथ दिखाई देते हैं। धार्मिक चित्रों में मां दुर्गा को 8, 10 या 18 भुजाओं के साथ भी दर्शाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा को 18 भुजाएं कैसे प्राप्त हुईं और उनके इतने हाथ होने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं मां दुर्गा की 18 भुजाओं से जुड़ी मान्यता और इसका धार्मिक महत्व...
मां दुर्गा की 18 भुजाओं की मान्यता
हिंदू धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को आदिशक्ति का स्वरूप माना गया है। उन्हें संसार की रक्षा करने वाली और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मां दुर्गा की अनेक भुजाएं उनकी असीम शक्ति और अलग-अलग कार्यों को करने की क्षमता का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के अनेक हाथ यह दर्शाते हैं कि वे एक साथ कई दिशाओं में फैली बुराइयों का सामना कर सकती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। मां दुर्गा की 18 भुजाओं का वर्णन और उनका स्वरूप अलग-अलग धार्मिक परंपराओं तथा देवी की प्रतिमाओं में देखने को मिलता है।
देवताओं की शक्तियों से हुआ देवी का प्राकट्य
देवी दुर्गा के प्राकट्य की प्रसिद्ध कथा मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत आने वाले दुर्गा सप्तशती से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर दिया था। उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, जिसके कारण देवता परेशान हो गए। इसके बाद सभी देवता भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास पहुंचे और महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।
धार्मिक कथा के अनुसार, देवताओं के क्रोध और तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसने देवी दुर्गा का स्वरूप धारण किया। सभी देवताओं ने देवी को अपनी-अपनी शक्तियां और अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। इसी कारण मां दुर्गा को देवशक्तियों का संयुक्त स्वरूप भी माना जाता है। हालांकि, दुर्गा सप्तशती की प्रचलित कथा में देवी के प्राकट्य और उनके अस्त्र-शस्त्रों का विस्तार मिलता है, लेकिन 18 भुजाओं की संख्या को लेकर सभी धार्मिक परंपराओं में एक जैसी कथा नहीं मिलती।
मां दुर्गा के हाथों में क्यों होते हैं अस्त्र-शस्त्र?
मां दुर्गा की अनेक भुजाओं में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र और प्रतीक दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवताओं ने देवी को महिषासुर का वध करने के लिए विभिन्न आयुध प्रदान किए थे। भगवान शिव से त्रिशूल, भगवान विष्णु से चक्र और अन्य देवताओं से अलग-अलग अस्त्र प्राप्त होने का वर्णन देवी की प्रचलित कथा में मिलता है। इन अस्त्रों का उद्देश्य केवल युद्ध करना नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करना भी माना जाता है।
मां दुर्गा की प्रतिमाओं में उनके हाथों में शंख, चक्र, त्रिशूल, तलवार, धनुष-बाण और अन्य आयुध दिखाई दे सकते हैं। अलग-अलग प्रतिमाओं में इनकी संख्या और स्वरूप में अंतर होता है। देवी के अनेक हाथ यह संदेश देते हैं कि जब बुराई बढ़ती है, तब उसका सामना करने के लिए शक्ति के अलग-अलग रूपों की आवश्यकता होती है।
18 भुजाओं का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक दृष्टि से मां दुर्गा की 18 भुजाओं को उनकी व्यापक शक्ति, सामर्थ्य और संसार की रक्षा करने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। उनके प्रत्येक हाथ में मौजूद अस्त्र या प्रतीक किसी न किसी शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्वरूप भक्तों को याद दिलाता है कि देवी केवल एक रूप में नहीं, बल्कि अनेक शक्तियों के माध्यम से अधर्म का सामना करती हैं।
हालांकि, 18 भुजाओं का कोई एक सर्वमान्य अर्थ सभी धार्मिक ग्रंथों में निर्धारित नहीं है। अलग-अलग परंपराओं में देवी के स्वरूप की व्याख्या अलग तरह से की जाती है। इसलिए 18 भुजाओं को मां दुर्गा की असीम शक्ति और अनेक रूपों में कार्य करने की क्षमता के प्रतीक के रूप में समझना उचित है।
महिषासुर के वध से जुड़ा है मां दुर्गा का स्वरूप