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Hanuman Ji Katha: हनुमान जी को क्यों मिला था अमरता का वरदान? जानें पौराणिक कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Secret of Hanuman Ji: हनुमान जी को अमरता का वरदान देवताओं के आशीर्वाद, माता सीता की कृपा और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति से जोड़कर देखा जाता है। 
 

Hanuman Ji Boon of Immortality
Hanuman Ji Boon of Immortality: हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। उन्हें भगवान श्रीराम का परम भक्त कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है और वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यही कारण है कि उन्हें चिरंजीवी भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को अमरता का वरदान कैसे मिला और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा प्रचलित है?

हनुमान जी को अमरता का वरदान मिलने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं। रामायण और विभिन्न पुराणों में उनके असाधारण पराक्रम, देवताओं से प्राप्त वरदानों और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं इस कथा को विस्तार से।

हनुमान जी ने निगलना चाहा था सूर्य

पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली और चंचल थे। एक दिन सुबह उन्होंने आकाश में उगते हुए सूर्य को देखा। उन्हें लगा कि सूर्य कोई लाल और चमकदार फल है। बाल हनुमान उसे खाने के लिए आकाश की ओर उड़ चले। हनुमान जी की गति और शक्ति इतनी अद्भुत थी कि वे देखते ही देखते सूर्य के निकट पहुंच गए। उस समय राहु सूर्य को ग्रसने के लिए आया हुआ था। हनुमान जी को देखकर राहु घबरा गया और सहायता के लिए देवराज इंद्र के पास पहुंचा।

इंद्रदेव अपने ऐरावत हाथी पर सवार होकर आए। जब उन्होंने हनुमान जी को सूर्य की ओर बढ़ते देखा, तो उन्हें रोकने के लिए अपना वज्र चला दिया। वज्र के प्रहार से हनुमान जी एक पर्वत पर जा गिरे और उनकी ठोड़ी पर चोट लगी। इसी घटना से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, उनका नाम हनुमान पड़ा।
 
हनुमान को किसने श्राप दिया?

पवनदेव के क्रोध से घबरा गए सभी देवता

अपने पुत्र हनुमान जी को घायल देखकर पवनदेव अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गए। उन्होंने संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया। वायु के बिना सभी प्राणियों का जीवन संकट में पड़ गया। मनुष्य, पशु-पक्षी और देवता तक परेशान होने लगे। जब सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा, तब सभी देवता ब्रह्माजी के पास पहुंचे। ब्रह्माजी पवनदेव के पास गए और उन्होंने बाल हनुमान को पुनः स्वस्थ किया। इसके बाद पवनदेव शांत हुए और संसार में वायु का प्रवाह फिर से शुरू हो गया। इस घटना के बाद देवताओं ने हनुमान जी को अनेक वरदान दिए, ताकि वे भविष्य में महान कार्य कर सकें और उनकी शक्तियां संसार के कल्याण में काम आएं।

देवताओं ने हनुमान जी को दिए अनेक वरदान

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी, इंद्रदेव, सूर्यदेव और अन्य देवताओं ने हनुमान जी को अलग-अलग शक्तियां और वरदान दिए। इन वरदानों के कारण वे अत्यंत पराक्रमी और असाधारण शक्तियों के स्वामी बने। कथाओं में वर्णन मिलता है कि हनुमान जी को अनेक दिव्य अस्त्रों से सुरक्षा, असाधारण बल, गति और अपनी इच्छा के अनुसार रूप बदलने जैसी शक्तियां प्राप्त हुईं। इन शक्तियों ने आगे चलकर भगवान श्रीराम की सेवा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हनुमान जी को मिले वरदानों का उद्देश्य केवल उन्हें शक्तिशाली बनाना नहीं था, बल्कि उनके माध्यम से धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करना भी था। यही कारण है कि रामायण में वे भगवान श्रीराम के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक के रूप में दिखाई देते हैं।

माता सीता ने दिया था अमर रहने का आशीर्वाद

हनुमान जी को अमरता प्राप्त होने से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा रामायण के सुंदरकांड से संबंधित है। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश दिया। उन्होंने माता सीता को श्रीराम की अंगूठी दिखाकर विश्वास दिलाया कि प्रभु उन्हें मुक्त कराने अवश्य आएंगे। हनुमान जी की भक्ति, बुद्धिमत्ता और निस्वार्थ सेवा देखकर माता सीता अत्यंत प्रसन्न हुईं। विभिन्न रामकथा परंपराओं में वर्णन मिलता है कि माता सीता ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि वे चिरंजीवी रहें और उन पर भगवान श्रीराम की कृपा बनी रहे। यह प्रसंग हनुमान जी की भक्ति और सेवा भावना को दर्शाता है। उन्होंने माता सीता को केवल संदेश ही नहीं दिया, बल्कि कठिन परिस्थितियों में उन्हें धैर्य और आशा भी प्रदान की।
 
हनुमान को किसने श्राप दिया?

श्रीराम की भक्ति ने बनाया हनुमान जी को अमर

हनुमान जी के चिरंजीवी होने की मान्यता का संबंध भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति से भी जोड़ा जाता है। जब भगवान श्रीराम ने अपना पृथ्वी पर अवतार कार्य पूर्ण किया, तब हनुमान जी ने उनसे प्रार्थना की कि जब तक संसार में उनके नाम का स्मरण होता रहे, तब तक वे पृथ्वी पर रहकर उनकी सेवा करते रहें। लोकप्रिय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें लंबे समय तक पृथ्वी पर रहने का आशीर्वाद दिया। इसी कारण हनुमान जी को उन सात चिरंजीवियों में गिना जाता है, जिनका उल्लेख परंपरागत श्लोक में मिलता है। मान्यता है कि जहां भी भगवान श्रीराम की कथा, कीर्तन या रामनाम का स्मरण होता है, वहां हनुमान जी की उपस्थिति मानी जाती है। भक्त मंगलवार और शनिवार को उनकी विशेष पूजा करते हैं तथा हनुमान चालीसा का पाठ करके साहस, आत्मविश्वास और संकटों से उबरने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

हनुमान जी की अमरता से क्या मिलती है सीख?

हनुमान जी की अमरता से जुड़ी कथाएं हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक बल में नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा और समर्पण में भी होती है। हनुमान जी के पास अपार शक्तियां थीं, लेकिन उन्होंने कभी उनका उपयोग अपने स्वार्थ के लिए नहीं किया। उन्होंने सदैव भगवान श्रीराम की सेवा और धर्म की रक्षा को प्राथमिकता दी। इसीलिए हनुमान जी को केवल बल और साहस का देवता नहीं, बल्कि आदर्श भक्त भी माना जाता है। उनकी कथा यह संदेश देती है कि निस्वार्थ भाव से किए गए कार्य, सच्ची निष्ठा और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना जीवन को सार्थक बनाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी को अमरता का वरदान देवताओं के आशीर्वाद, माता सीता की कृपा और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति से जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग रामायण और पुराण परंपराओं में इन प्रसंगों के विवरण में अंतर मिल सकता है, लेकिन सभी में हनुमान जी की महिमा, शक्ति और भक्ति को विशेष स्थान दिया गया है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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