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Ekdant Ganesh Story: आखिर कैसे पड़ा भगवान गणेश का नाम एकदंत, जानें क्या है पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Ekdant Ganesh Story: सनातन धर्म में किसी भी पूजा या नए कार्य को शुरू करने से पहले गणपति पूजा का प्रावधान है. उन्हें देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है. मान्यता है कि बप्पा की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है

Ekdant Ganesh Story
Ekdant Ganesh Story: सनातन धर्म में किसी भी पूजा या नए कार्य को शुरू करने से पहले गणपति पूजा का प्रावधान है। उन्हें देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि बप्पा की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत आदि नामों से जाना जाता है, जिनका अपना अलग महत्व है। आज हम गणेश जी के एकदंत नाम की महिमा जानेंगे कि उन्हें यह नाम कैसे मिला?

बप्पा के एकदंत होने का क्या कारण है?

भगवान गजानन को एकदंत इसलिए कहा जाता है, क्योंकि भगवान गणेश का एक दांत टूटा हुआ है। इसके साथ ही इसे लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार परशुराम जी भगवान शिव से मिलने आए थे, लेकिन उस समय भोलेनाथ ध्यान में लीन थे, जिसके कारण भगवान गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया था। हालांकि कैलाशपति के परम भक्त परशुराम जी इस बात पर अड़े थे कि वह शिव से मिले बिना नहीं जाएंगे।

वहीं भगवान गणेश भी अपनी बात पर पूरी तरह अड़े रहे। इस पर परशुराम जी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश जी को युद्ध के लिए ललकारा, जिसे बप्पा ने स्वीकार कर लिया और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इसके बाद परशुराम जी ने भगवान गणेश पर उस फरसे से प्रहार किया जो उन्हें स्वयं शिव से प्राप्त हुआ था।

गजानन ने अपने पिता के अस्त्र का सम्मान किया और परशुराम जी के प्रहार से उनका एक दांत टूट गया। एक दांत टूटने के कारण ही भगवान गणेश एकदंत कहलाए। हालांकि इस घटना के बाद भगवान परशुराम को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने बप्पा को सारे तेज, बल, कौशल और ज्ञान का आशीर्वाद दिया।

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