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Tulsi Puja Niyam: रविवार के दिन तुलसी को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है जल, जानें क्या है वजह

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Tulsi Plant: हिंदू धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि एक देवी के रूप में पूजा जाता है। इसे विष्णु प्रिया और महालक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि तुलसी की पूजा का अत्यंत गहरा धार्मिक, आध्यात्मिक महत्व है।

रविवार के दिन तुलसी को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है जल, जानें क्या है वजह
Tulsi Puja Upay: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, इसलिए इसे 'हरिप्रिया' भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन तुलसी को जल चढ़ाना वर्जित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन तुलसी को जल चढ़ाने या उनके पत्तों को तोड़ने से उनका व्रत टूट जाता है। इसे शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे घर में नकारात्मकता और आर्थिक परेशानी आ सकती है।

विश्राम का दिन

रविवार का दिन भगवान विष्णु और देवी तुलसी के विश्राम का दिन माना जाता है। इस दिन उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। तुलसी को जल चढ़ाना या उनके पत्तों को तोड़ना उन्हें परेशान करने जैसा माना जाता है।

रविवार को जल चढ़ाएं तो क्या होगा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति रविवार के दिन तुलसी को जल चढ़ाता है या उनके पत्तों को तोड़ता है, तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें घर में दरिद्रता का आना, धन हानि, और पारिवारिक कलह जैसी समस्याएं शामिल हैं। तुलसी के पौधे को जल चढ़ाने का सबसे उत्तम समय रविवार को छोड़कर हर दिन सुबह होता है।

तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए भी कुछ नियम हैं। एकादशी, द्वादशी, रविवार, मंगलवार और ग्रहण के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। सबसे अच्छा है कि आप पत्तों को तोड़ने के बजाय उन्हें तब लें जब वे खुद ही गिर जाएं। इन मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन तुलसी के पौधे को जल नहीं चढ़ाना चाहिए। आप अन्य दिनों में, विशेषकर गुरुवार को जल चढ़ाकर और घी का दीपक जलाकर देवी तुलसी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

तुलसी के पौधे रखने की सही दिशा

वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। इसे घर में सही दिशा में रखने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। तुलसी के पौधे को रखने के लिए सबसे उत्तम दिशाएं उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और पूर्व हैं। यह दिशा तुलसी के पौधे के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। यह दिशा जल तत्व और भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करती है। इस दिशा में तुलसी का पौधा रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की मानी जाती है। इस दिशा में तुलसी का पौधा रखने से घर में सुख-समृद्धि और धन में वृद्धि होती है। पूर्व दिशा में पौधा रखने से तुलसी को सुबह की पहली किरणें मिलती हैं, जो उसके विकास के लिए बहुत अच्छी होती हैं। यह दिशा स्वास्थ्य और सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ाती है। यदि आपके पास घर के अंदर या आंगन में जगह नहीं है, तो आप बालकनी में भी तुलसी का पौधा रख सकते हैं, बशर्ते बालकनी की दिशा उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व हो।

तुलसी पूजा का महत्व

मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है और उसकी नियमित पूजा होती है, उस घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है। तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा और भोग अधूरा माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यही वजह है कि तुलसी को हरिप्रिया (भगवान हरि की प्रिय) भी कहा जाता है। तुलसी के पौधे की पूजा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह घर के वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाती है। तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापों का नाश करता है, और उसकी पूजा करना व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है।

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