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Onam Festival: केरल का सबसे बड़ा उत्सव क्यों माना जाता है ओणम पर्व, जानें धार्मिक मान्यता

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Onam Parv: ओणम पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि केरल की आत्मा और पहचान है। यह उत्सव हमें सिखाता है कि सच्चा राजा वही है जो अपनी प्रजा के सुख-दुख में साथ खड़ा हो। 

केरल का सबसे बड़ा उत्सव क्यों माना जाता है ओणम पर्व, जानें धार्मिक मान्यता
Onam Festival Importance: भारत संस्कृतियों और परंपराओं का देश माना जाता है। हर राज्य की अपनी विशेषता है, लेकिन जब केरल की बात आती है तो वहां का सबसे बड़ा और लोकप्रिय पर्व है, ओणम। यह उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी लोगों के लिए अहम है। ओणम को “केरल का राष्ट्रीय उत्सव” भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि यह पर्व इतना विशेष क्यों है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

ओणम दस दिनों तक मनाया जाने वाला भव्य उत्सव है, जो अगस्त-सितंबर माह में आता है। यह समय केरल में नई फसल के आगमन और प्राकृतिक सौंदर्य के चरम का होता है। हर घर में साज-सज्जा, पुष्प सजावट (पुक्कलम), वल्लमकली (नौका दौड़), ओणम साद्य (भव्य भोज) और पारंपरिक नृत्यों का आयोजन होता है। यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि समृद्धि, भाईचारा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।

धार्मिक मान्यता

ओणम पर्व का संबंध प्राचीन कथा से है, जो महाबली राजा और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी है। कहानी के अनुसार, महाबली दानवीर और न्यायप्रिय राजा थे। उनके राज्य में सभी सुखी और समृद्ध थे। उनकी प्रजा उन्हें अत्यंत प्रेम करती थी। किंतु महाबली की बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति से देवगण चिंतित हो उठे। तब भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) रूप में अवतार लेकर महाबली से भिक्षा मांगी।


वामन ने तीन पग भूमि मांगी। महाबली ने वचन दे दिया। वामन ने अपना विराट स्वरूप धारण किया। एक पग में आकाश और दूसरे में पृथ्वी नाप ली। तीसरे पग के लिए स्थान न बचा तो महाबली ने विनम्रता से अपना सिर अर्पित कर दिया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया। साथ ही यह वरदान भी दिया कि वे वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे। यही दिन ओणम के रूप में मनाया जाता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष

ओणम पर्व केवल धार्मिक कथा तक सीमित नहीं है। यह केरल की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। इस दिन लोग नए वस्त्र पहनते हैं, घरों को फूलों से सजाते हैं और रिश्तेदारों-मित्रों को आमंत्रित कर भव्य भोज का आयोजन करते हैं।
  • पुक्कलम: घर के आंगन में फूलों से बनाई जाने वाली रंगोली होती है।
  • ओणम साद्य: केले के पत्ते पर परोसे जाने वाला पारंपरिक भोजन, जिसमें अनेक प्रकार के व्यंजन होते हैं।
  • वल्लमकली (नौका दौड़): केरल की नदियों में सजाई गई लंबी नौकाओं की प्रतियोगिता होती है।
  • कथकली और थिरुवातिरा नृत्य: पारंपरिक नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियां की जाती हैं।
  • ये सभी मिलकर ओणम को एक संपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव बना देते हैं।

जानें क्या है मान्यता

ओणम पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि केरल की आत्मा और पहचान है। यह उत्सव हमें सिखाता है कि सच्चा राजा वही है जो अपनी प्रजा के सुख-दुख में साथ खड़ा हो। महाबली की भक्ति, त्याग और दानशीलता आज भी इस पर्व का मूल संदेश है। यही कारण है कि ओणम को केरल का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है—जहाँ धर्म, संस्कृति और लोक परंपरा सब एक साथ जीवंत हो उठते हैं।

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