Tambe Ke Kalash: सनातन धर्म में कलावा बांधना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, आपने देखा होगा कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, हवन से पहले कलाई पर कलावा बांधने का नियम है। इसे रक्षासूत्र कहा जाता है, पेड़-पौधे और पवित्र वस्तुओं पर भी कलावा बांधने का नियम है।
Tambe Ke Kalash: सनातन धर्म में कलावा बांधना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, आपने देखा होगा कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, हवन से पहले कलाई पर कलावा बांधने का नियम है। इसे रक्षासूत्र कहा जाता है, पेड़-पौधे और पवित्र वस्तुओं पर भी कलावा बांधने का नियम है। कलावा पूजन से पहले तांबे के कलश पर भी कलावा यानी रक्षासूत्र बांधा जाता है। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है?
तांबे के लोटे से चढ़ाया जाता है जल
सनातन मान्यताओं में तांबे को सबसे पवित्र धातुओं में से एक माना जाता है, शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाने का भी नियम है। इसके अलावा सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भी तांबे के लोटे का इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा जब घर में पूजा-पाठ किया जाता है, तब भी तांबे का कलश स्थापित किया जाता है।
इसलिए तांबे के लोटे पर कलावा बांधा जाता है
तांबे की एक खास बात यह है कि यह धातु जितनी जल्दी अशुद्ध होती है, उतनी ही जल्दी शुद्ध भी हो जाती है। इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए तांबे के लोटे पर कलावा बांधा जाता है।
कलावा बांधने से उसमें नौ ग्रहों का वास होता है
पौराणिक दस्तावेजों की मानें तो तांबे के बर्तन पर कलावा बांधने से उस बर्तन में नौ ग्रहों का वास होता है, उन सभी ग्रहों की शुभता समाहित होती है और सकारात्मकता फैलती है। आसपास की नकारात्मक ऊर्जा और पूजा-पाठ और ग्रहों से जुड़ा कोई भी दोष जल्दी दूर होता है।