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Sawan 2026: सावन में कौन-सा रुद्राक्ष धारण करना होता है शुभ? जानें किसे पहनने से मिलती है भगवान शिव की कृपा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sawan 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक धारण किया जाता है। इसे भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है और यह लगभग सभी लोगों के लिए उपयुक्त माना गया है।

Sawan
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं, महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग रुद्राक्ष भी धारण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ था, इसलिए इसे धारण करने वाले व्यक्ति पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है।

हालांकि, हर रुद्राक्ष का अपना अलग महत्व और प्रभाव बताया गया है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि सावन में कौन-सा रुद्राक्ष पहनना सबसे शुभ माना जाता है? क्या सभी लोग एक ही रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं? और किस रुद्राक्ष को पहनने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है? अगर आपके मन में भी ऐसे ही सवाल हैं, तो आइए जानते हैं सावन में रुद्राक्ष धारण करने से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न मुखी रुद्राक्षों के महत्व के बारे में...

सावन में रुद्राक्ष धारण करने का धार्मिक महत्व

शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में रुद्राक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भगवान शिव के नेत्रों से गिरे अश्रु पृथ्वी पर रुद्राक्ष के रूप में प्रकट हुए। इसलिए इसे शिव का अत्यंत प्रिय माना जाता है। सावन के दौरान रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव की आराधना और भी फलदायी मानी जाती है। भक्त इस महीने में रुद्राक्ष पहनकर पूजा, जप और ध्यान करते हैं, जिससे मन की एकाग्रता बढ़ने और आध्यात्मिक साधना में सहायता मिलने की मान्यता है।

 

सावन में कौन-सा रुद्राक्ष सबसे शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक धारण किया जाता है। इसे भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है और यह लगभग सभी लोगों के लिए उपयुक्त माना गया है। पंचमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति का मन शांत रहने, पूजा-पाठ में रुचि बढ़ने और शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यही कारण है कि सावन के महीने में अधिकांश श्रद्धालु इसी रुद्राक्ष को धारण करते हैं।

पंचमुखी रुद्राक्ष का महत्व

पंचमुखी रुद्राक्ष पांच मुखों वाला होता है और इसे कालाग्नि रुद्र का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे धारण करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और साधक का मन आध्यात्मिक कार्यों की ओर आकर्षित होता है। जो लोग पहली बार रुद्राक्ष धारण कर रहे हैं, उनके लिए भी पंचमुखी रुद्राक्ष को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसे पुरुष और महिलाएं दोनों पहन सकते हैं।

एकमुखी रुद्राक्ष का क्या महत्व है?

एकमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत दुर्लभ और विशेष रुद्राक्ष माना जाता है। मान्यता है कि जो साधक विशेष साधना या शिव उपासना करते हैं, उनके लिए एकमुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व होता है। हालांकि इसकी उपलब्धता बहुत कम होती है और बाजार में इसके नाम पर नकली रुद्राक्ष भी मिल जाते हैं। इसलिए इसे खरीदते समय विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

 

दोमुखी रुद्राक्ष किसके लिए माना जाता है शुभ?

दोमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पारिवारिक सुख, आपसी प्रेम और दांपत्य जीवन में मधुरता का प्रतीक माना जाता है। सावन के दौरान कई श्रद्धालु शिव-पार्वती का आशीर्वाद पाने की भावना से दोमुखी रुद्राक्ष भी धारण करते हैं।

तीनमुखी और चारमुखी रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व

तीनमुखी रुद्राक्ष को अग्निदेव का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्यक्ति को नकारात्मक भावनाओं से दूर रखने और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

वहीं चारमुखी रुद्राक्ष को भगवान ब्रह्मा से संबंधित माना गया है। इसे ज्ञान, अध्ययन और वाणी से जुड़ी साधना के लिए शुभ माना जाता है। विद्यार्थी और शिक्षा से जुड़े लोग भी धार्मिक आस्था के अनुसार इसे धारण करते हैं।

छहमुखी और सातमुखी रुद्राक्ष का महत्व

छहमुखी रुद्राक्ष को भगवान कार्तिकेय का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुशासन, साहस और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। सातमुखी रुद्राक्ष को माता महालक्ष्मी से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु इसे सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की कामना से धारण करते हैं।

 

Benefits of wearing 4 Mukhi Rudraksha

रुद्राक्ष धारण करने का शुभ समय

सावन के सोमवार को रुद्राक्ष धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा सावन के किसी भी सोमवार, प्रदोष व्रत या शुभ मुहूर्त में भी इसे पहना जा सकता है। रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे गंगाजल और स्वच्छ जल से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव का पूजन कर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा है।

क्या सभी लोग एक ही रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचमुखी रुद्राक्ष लगभग सभी लोगों के लिए उपयुक्त माना गया है। लेकिन अन्य मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति की आस्था, साधना और धार्मिक उद्देश्य के अनुसार धारण किए जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति विशेष मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहता है, तो परंपरा के अनुसार किसी योग्य विद्वान या जानकार आचार्य से परामर्श लेकर ही उसे धारण करना उचित माना जाता है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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