Rudraksha Rules: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव पूजा, रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत और रुद्राक्ष धारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष को भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना गया है, इसलिए इसे शिव का अत्यंत प्रिय आभूषण भी कहा जाता है। यही कारण है कि सावन में रुद्राक्ष धारण करने का विशेष महत्व बताया गया है।
हालांकि, रुद्राक्ष केवल पहन लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शास्त्रों में इसे धारण करने की सही विधि, उचित समय और कुछ आवश्यक नियमों का भी उल्लेख मिलता है। यदि इन नियमों का पालन करते हुए रुद्राक्ष धारण किया जाए तो इसे अधिक शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुद्राक्ष पहनने से पहले कौन-कौन से नियम अपनाने चाहिए? क्या किसी भी दिन और किसी भी तरह से रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है? आइए जानते हैं सावन में रुद्राक्ष धारण करने की सही विधि और उससे जुड़े धार्मिक नियम।
सावन में रुद्राक्ष धारण करने का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और शिव पुराण में रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव ने जब संसार के कल्याण के लिए तप किया तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रु पृथ्वी पर रुद्राक्ष के वृक्ष के रूप में प्रकट हुए, इसलिए रुद्राक्ष को धारण करना शिव कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम माना जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होने के कारण इस महीने रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान शिव मंत्रों का जप करते हुए रुद्राक्ष धारण करते हैं और नियमित रूप से शिव आराधना करते हैं।
रुद्राक्ष धारण करने का सबसे शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि या किसी भी शुभ मुहूर्त में रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है। प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा करने के पश्चात रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ माना गया है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद का समय अधिक शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष धारण करते समय भगवान शिव का स्मरण और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।
रुद्राक्ष धारण करने से पहले क्या करें?
रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसकी विधिवत पूजा करने की परंपरा है। सबसे पहले रुद्राक्ष को स्वच्छ जल से धोएं। इसके बाद गंगाजल से शुद्ध करें। फिर भगवान शिव के समक्ष रखकर चंदन, अक्षत, बेलपत्र और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप दिखाकर "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। पूजा पूरी होने के बाद श्रद्धापूर्वक रुद्राक्ष धारण करें। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार विधिपूर्वक धारण किया गया रुद्राक्ष अधिक शुभ माना जाता है।
किस धागे या माला में पहनना चाहिए?
रुद्राक्ष को लाल, पीले या काले धागे में धारण किया जा सकता है। कई श्रद्धालु इसे चांदी या सोने में जड़वाकर भी पहनते हैं। पंचधातु में धारण करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि रुद्राक्ष को श्रद्धा और पवित्र भावना के साथ धारण किया जाए।
कौन सा रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है?
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग मुख वाले रुद्राक्ष का अलग महत्व बताया गया है।
- एकमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है।
- पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक प्रचलित और सामान्य रूप से धारण किया जाने वाला रुद्राक्ष माना जाता है।
- ग्यारहमुखी रुद्राक्ष का संबंध भगवान हनुमान से माना जाता है।
- चौदहमुखी रुद्राक्ष को अत्यंत दुर्लभ और विशेष महत्व वाला बताया गया है।
रुद्राक्ष धारण करते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए?
- रुद्राक्ष धारण करने के बाद प्रतिदिन भगवान शिव का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
- सुबह स्नान के बाद स्वच्छ मन से शिव मंत्रों का जप करने की परंपरा है।
- रुद्राक्ष को साफ-सुथरा रखना चाहिए और समय-समय पर गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करना चाहिए।
- यदि माला का धागा पुराना हो जाए तो उसे बदलकर दोबारा विधिपूर्वक धारण करना चाहिए।
- रुद्राक्ष का सम्मान करना चाहिए और उसे जमीन पर रखने से बचना चाहिए।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष धारण करते समय सात्विक जीवनशैली अपनाना भी शुभ माना जाता है।
क्या रुद्राक्ष पहनकर शिव पूजा की जा सकती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष पहनकर भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते समय रुद्राक्ष धारण करना विशेष फलदायी माना गया है। इसी कारण सावन के दौरान बड़ी संख्या में शिव भक्त रुद्राक्ष धारण कर नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
रुद्राक्ष की देखभाल कैसे करें?