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Garuda Purana: मृत्यु के बाद धरती पर क्यों आती है आत्मा, जानें गरुण पुराण में क्या है जिक्र?

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Garuda Purana Story: गरुण पुराण स्पष्ट कहता है कि आत्मा अमर है, वह शरीर छोड़ने के बाद भी अपनी यात्रा जारी रखती है। यदि उसके कर्म अधूरे हों, इच्छाएं अपूर्ण हों या तर्पण न किया गया हो, तो वह धरती पर लौटती है। 

मृत्यु के बाद धरती पर क्यों आती है आत्मा, जानें गरुण पुराण में क्या है जिक्र?
Garuda Purana Katha in Hindi: दुनिया में मृत्यु मानव जीवन का सबसे गूढ़ और रहस्यमयी सत्य है। शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। यह सत्य वेदों, उपनिषदों और पुराणों में बार-बार प्रतिपादित किया गया है, लेकिन यह प्रश्न आज भी जिज्ञासु मन को विचलित करता है। क्या मृत्यु के बाद आत्मा धरती पर लौटती है? यदि हां, तो क्यों? इस रहस्य का विस्तृत वर्णन गरुण पुराण में मिलता है, जो मृत्यु, आत्मा और परलोक यात्रा का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ माना गया है।

गरुण पुराण 18 प्रमुख पुराणों में से एक है। इसे भगवान विष्णु के वाहन गरुण और स्वयं भगवान विष्णु के संवाद के रूप में वर्णित किया गया है। इस ग्रंथ में जीवन, मृत्यु, कर्मफल, यमलोक की यात्रा, पितृलोक और मोक्ष का अत्यंत गूढ़ विवेचन मिलता है। इसी पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा किस प्रकार शरीर छोड़ती है, किन मार्गों से गुजरती है, और क्यों कभी-कभी पुनः धरती पर आती है।

मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा

गरुण पुराण के अनुसार, जब व्यक्ति की आयु पूर्ण होती है या उसके कर्मों का फल समाप्त हो जाता है, तब प्राणवायु शरीर से बाहर निकल जाती है। यमदूत आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार यमलोक की ओर ले जाते हैं। वहां यमराज के दरबार में आत्मा का लेखा-जोखा देखा जाता है। कौन से पुण्य किए, कौन से पाप।


शास्त्र में कहा गया है कि यथा कर्म तथा गत्यं नान्यथा भवति ध्रुवम्। अर्थात् आत्मा की गति उसी के कर्मों से निर्धारित होती है। पुण्यात्मा आत्माएं स्वर्ग की ओर जाती हैं, जबकि पापात्माओं को नरक में भेजा जाता है, लेकिन कुछ आत्माएं ऐसी होती हैं जिनके कर्म अधूरे रहते हैं या जिनकी मृत्यु अकस्मात, असमय या हिंसक रूप से होती है। वही आत्माएं धरती पर भटकती हैं।

धरती पर आत्मा के आने के कारण

गरुण पुराण में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि आत्मा क्यों पुनः पृथ्वी पर आती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं।

अधूरी इच्छाएं

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु ऐसे समय होती है जब उसकी कोई तीव्र इच्छा अपूर्ण रह जाती है। जैसे धन की लालसा, परिवार के प्रति मोह, बदला या कोई अधूरा कार्य, तो आत्मा उन इच्छाओं के बंधन में बंध जाती है। वह तब तक शांति नहीं पा सकती जब तक वह इच्छा समाप्त न हो जाए। इसलिए ऐसी आत्माएं पृथ्वी पर भटकती हैं।

असमय या हिंसक मृत्यु

जो व्यक्ति दुर्घटना, आत्महत्या या हिंसा से मरता है, उसकी आत्मा अचानक शरीर से निकलने के कारण विचलित और अस्थिर रहती है। गरुण पुराण के अनुसार, ऐसी आत्माओं को यमदूत तुरंत नहीं ले जाते, बल्कि वे कुछ समय तक अपने पुराने स्थानों पर घूमती रहती हैं, क्योंकि वे अपनी मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती हैं।

श्राद्ध या तर्पण न किया जाना

अगर परिवारजन मृतक के लिए श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान नहीं करते, तो आत्मा को पितृलोक तक पहुंचने में कठिनाई होती है। तब वह धरती पर अपने परिजनों के बीच ही रहती है, जब तक कि कोई उसे तर्पण और जल अर्पण न कर दे। इसी कारण हिंदू धर्म में पितृपक्ष और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व बताया गया है।

अत्यधिक मोह या आसक्ति

जो व्यक्ति सांसारिक मोह में बहुत बंधा रहता है। जैसे अपने घर, परिवार या संपत्ति से, उसकी आत्मा मृत्यु के बाद भी वहीं भटकती है। गरुण पुराण कहता है कि मोहात् देहं न मुञ्चन्ति, तस्माद् भूयः पतन्ति ते। अर्थात् जो मोह नहीं छोड़ते, वे बार-बार जन्म-मृत्यु के चक्र में पड़ते हैं।

आत्मा के लौटने के संकेत

  • गरुण पुराण में यह भी उल्लेख मिलता है कि जब आत्मा धरती पर लौटती है तो उसके कुछ संकेत दिखाई देते हैं।
  • घर में अचानक किसी अज्ञात सुगंध या गंध का आना
  • स्वप्न में मृत व्यक्ति का दर्शन होना
  • बिना कारण दीपक का बुझ जाना या जल उठना
  • किसी विशेष दिन (जैसे मृत्यु तिथि या पितृपक्ष में) किसी अदृश्य अनुभूति का होना।
  • इन सबको आत्मा की उपस्थिति या उसके संकेत के रूप में देखा गया है।

मोक्ष या मुक्ति का मार्ग

गरुण पुराण का सार यह है कि आत्मा का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है अर्थात् पुनर्जन्म से मुक्ति। यह तभी संभव है जब व्यक्ति जीवन में सत्कर्म, भक्ति और संयम का पालन करे। साथ ही परिवारजन भी मृत आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, दान, और गीता पाठ जैसे कर्म करें। शास्त्र में कहा गया है कि दानं तपो जपो यज्ञः, श्राद्धं च पितृतर्पणम्। ये कर्म आत्मा को ऊर्ध्वगति प्रदान करते हैं और उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त करते हैं।

जानें क्या है मान्यता

गरुण पुराण स्पष्ट कहता है कि आत्मा अमर है, वह शरीर छोड़ने के बाद भी अपनी यात्रा जारी रखती है। यदि उसके कर्म अधूरे हों, इच्छाएं अपूर्ण हों या तर्पण न किया गया हो, तो वह धरती पर लौटती है। परंतु यदि व्यक्ति जीवन में धर्म और सत्य के मार्ग पर चलता है, तो मृत्यु के बाद आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए हमें जीवन में ही ऐसे कर्म करने चाहिए कि मृत्यु के बाद हमारी आत्मा को भटकना न पड़े। क्योंकि आत्मा का असली घर न धरती है, न आकाश बल्कि परमात्मा का चरण ही उसका अंतिम ठिकाना है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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