Shardiya Navratri: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का खास महत्व है। यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह की लोक परंपराएं निभाई जाती हैं।
Shardiya Navratri: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का खास महत्व है। यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह की लोक परंपराएं निभाई जाती हैं। ऐसी ही एक परंपरा है सांझी माता की पूजा। उत्तर भारत के कुछ इलाकों में शारदीय नवरात्रि के दौरान सांझी माता की पूजा करने का रिवाज है। गोबर और मिट्टी से सांझी माता की आकृतियां बनाई जाती हैं इसके बाद महिलाएं और कुंवारी लड़कियां लोक गीत गाते हुए खास रस्में निभाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांझी माता की पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है? अगर नहीं तो आइए इस लेख में हम आपको विस्तार से बताते हैं।
सांझी माता की पूजा कहां होती है?
शारदीय नवरात्रि के दौरान हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में दीवारों पर गोबर से सांझी माता की आकृतियां बनाई जाती हैं और उन्हें फूलों और पत्तियों से सजाया जाता है।
परंपरा के अनुसार सांझी माता को स्वयं देवी दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। जब नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा धरती पर आती हैं तो दीवारों पर उनकी छवि स्थापित करके और सांझी माता की विधिवत पूजा करके उनका स्वागत किया जाता है।
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नवरात्रि के दौरान कुंवारी लड़कियां सांझी माता की आकृति बनाती हैं और उनकी पूजा करती हैं। माना जाता है कि सांझी माता की पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
सांझी कैसे बनाई जाती है
सांझी की आकृति बनाना भी उसकी पूजा करने जितना ही खास है। गांवों में लोग अक्सर मिट्टी से सांझी माता की मूर्ति बनाते हैं। मुख्य आकृति के साथ-साथ तारे जैसी आकृतियां भी बनाई जाती हैं। आखिर में सांझी माता को चूड़ियों, बिंदी और अन्य पारंपरिक आभूषणों से सजाया जाता है।
सांझी माता का विसर्जन कब होता है?
नवरात्रि के दौरान महिलाएं और लड़कियां हर शाम सांझी माता की आरती करने और लोक गीत गाने के लिए इकट्ठा होती हैं। इसके बाद दशहरा या नवरात्रि के आखिरी दिन सांझी माता की प्रतिमा को दीवार से हटाकर किसी पवित्र नदी या तालाब में विधि-विधान से विसर्जित कर दिया जाता है।